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दमोह: संघ को किताब, अखबार और भाषणों से नहीं, संघ आकर जानिए… युवा सम्मेलन में गूंजा राष्ट्रवाद

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष

दमोह/वैभव नायक/खबर डिजिटल/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत शनिवार को दमोह नगर के तहसील मैदान में भव्य युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में जिले के विभिन्न खंडों से आए 5 हजार से अधिक युवाओं ने सहभागिता की। 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं ने इस दौरान संघ के वक्ताओं के ओजस्वी और राष्ट्रवादी विचार सुने तथा राष्ट्र प्रथम की भावना को आत्मसात किया।

स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपनाने का आह्वान
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता, डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार एवं गुरु गोलवलकर के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच पर महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल के प्राचार्य डी.के. मिश्रा, उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य आर.पी. पटेल, संघ के प्रांत प्रचारक बृजकांत जी तथा जिला संघचालक अश्वनी नामदेव जी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है और स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि युवा अपने सामर्थ्य और ज्ञान से किसी भी परिस्थिति को बदल सकते हैं।

संघ को लेकर भ्रांतियों पर प्रहार
प्रांत प्रचारक बृजकांत जी ने कहा कि संघ को लेकर समाज में कई भ्रांतियां और झूठ फैलाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता आंदोलन में संघ और उसके संस्थापक डॉ. हेडगेवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजों के सामने ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करने के कारण डॉ. हेडगेवार को अंग्रेजी शासन के विरुद्ध षड्यंत्रकारी तक घोषित किया गया।उन्होंने कहा कि संघ ने किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ वन सत्याग्रह, विभाजन के समय पाकिस्तान से आए शरणार्थियों की रक्षा और पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि संघ को समझने के लिए किताबों और भाषणों पर नहीं, बल्कि स्वयं संघ में आकर अनुभव करें।

पंच परिवर्तन और सांस्कृतिक गर्व का संदेश
प्रांत प्रचारक ने बताया कि शताब्दी वर्ष पर संघ ने समाज परिवर्तन के लिए पंच परिवर्तन को लक्ष्य बनाया है, जिसमें युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि ज्ञान है और हमें अपनी भाषा, संस्कृति, वेशभूषा और परंपराओं पर गर्व करना चाहिए।

प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम बने आकर्षण
सम्मेलन के दौरान युवाओं के लिए एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के दुर्लभ समाचार पत्र, गुमनाम नायकों का योगदान, भारत की प्राचीन धरोहर, संविधान और देश की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से युवाओं ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा, कार्य और विचारों को जाना।

चर्चा सत्र के साथ समापन
उद्बोधनों के पश्चात युवाओं का खंडवार चर्चा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पंच परिवर्तन और संघ की कार्यपद्धति पर विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद संघ गीत का गायन, समरसता भोज एवं कल्याण मंत्र के साथ आयोजन का समापन किया गया।

हिंदू रथ को किया गया रवाना
कार्यक्रम के उपरांत 15 से 30 जनवरी तक जिले में आयोजित होने वाले हिंदू सम्मेलनों के प्रचार हेतु रथ का विधिवत पूजन-अर्चन कर शुभारंभ किया गया। आगामी दिनों में जिले के 167 स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनकी जानकारी रथ के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाई जाएगी।

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