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Friday, April 17, 2026
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Homeमध्यप्रदेशDindori News: 22 पशुओं से भरा ट्रक पकड़ा… अवैध तस्करी का भंडाफोड़

Dindori News: 22 पशुओं से भरा ट्रक पकड़ा… अवैध तस्करी का भंडाफोड़

शहपुरा पुलिस ने की कार्रवाई

डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ जिले में अवैध पशु तस्करी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस प्रशासन की सख्ती के बावजूद तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना हुआ है। सोमवार को शहपुरा थाना क्षेत्र के रनगांव में डायल-112 की सतर्क टीम ने मुखबिर की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक ट्रक को पकड़ा जिसमें 22 नग भैंस एवं पड़ा ठूंस-ठूंसकर भरे गए थे।

जबलपुर बूचड़खाने ले जाए जा रहे थे पशु
प्राथमिक जांच में सामने आया कि वाहन में भरे सभी पशुओं को जबलपुर स्थित बूचड़खाने ले जाने की योजना थी। तस्करों ने ट्रक में पशुओं को अमानवीय ढंग से बांधकर भरा हुआ था, जिसकी स्थिति देखकर पुलिस दल भी हैरान रह गया।

एक तस्कर गिरफ्तार, दूसरा अंधेरे में फरार
कार्यवाही के दौरान वाहन चालक सहित एक आरोपी को पुलिस ने मौके से हिरासत में ले लिया, जबकि उसका साथी घने अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। फरार आरोपी की तलाश में पुलिस टीमों को लगाया गया है। हिरासत में लिए गए आरोपी से पूछताछ में पुलिस को कई अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।

शहपुरा पुलिस का बयान
शहपुरा थाना प्रभारी ने बताया किडायल-112 की टीम ने समय रहते वाहन पकड़कर बड़ी घटना को रोका है। अवैध पशु परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित है। आरोपी के विरुद्ध पशु क्रूरता अधिनियम सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जा रहा है। फरार आरोपी का भी जल्द पता लगा लिया जाएगा।

इन धाराओं में दर्ज हो सकता है केस
पुलिस द्वारा बरामदगी के बाद आमतौर पर ऐसे मामलों में निम्न धाराएँ लगाई जाती हैं

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 – पशुओं के साथ क्रूरता
म.प्र. गोवंश वध निषेध अधिनियम 2004 (जहाँ लागू हो) – अवैध परिवहन/वध
भा.दं.सं. धारा 429 – पशु को हानि पहुंचाना
भा.दं.सं. धारा 188 – अवैध परिवहन व प्रशासनिक आदेश का उल्लंघन
मोटर व्हीकल ऐक्ट की धाराएँ – ओवरलोडिंग व गलत परिवहन

जब्त वाहन को शहपुरा थाने में खड़ा कर दिया गया है और पशुओं को सुरक्षित गौशाला में भेजने की कार्रवाई चल रही है।

जांच अब बड़े नेटवर्क की ओर
पुलिस इस मामले को केवल एक वाहन गिरफ्तारी न मानकर, इसके पीछे सक्रिय पूरे तस्करी नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है। आरोपियों के मोबाइल, कॉल डिटेल और पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड भी जांच में शामिल किए जा रहे हैं।

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