डिंडौरी /शैलेश नामदेव /खबर डिजिटल/ पर्यावरण संरक्षण और जल स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने वाला जिले का फ्लैगशिप कार्यक्रम “मैया अभियान” माँ नर्मदा की सेवा और संरक्षण का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। यह अभियान पूर्णतः स्वेच्छा आधारित है, जिसमें स्वयंसेवक आत्मप्रेरणा से हर रविवार प्रातः 7 बजे नर्मदा तट पर उपस्थित होकर श्रमदान करते हैं। मैया अभियान की शुरुआत नवंबर 2023 में हुई थी और तब से यह निरंतर जारी है। इसी क्रम में रविवार को पुल पास घाट में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। यह घाट डिंडोरी क्षेत्र में नर्मदा नदी के सर्वाधिक प्रदूषित स्थलों में गिना जाता है। अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने नर्मदा नदी के भीतर जमी काई, गंदे कपड़े, प्लास्टिक कचरा एवं काँच की बोतलें निकालकर घाट और नदी को स्वच्छ किया।
मां नर्मदा की धारा को निर्मल बनाए रखने का संकल्प
अभियान से जुड़े सेवकों ने बताया कि यदि नर्मदा तट पर निवासरत नागरिक स्वयं अपने-अपने घाटों की जिम्मेदारी लें और नियमित साफ-सफाई रखें, तो यह डिंडोरी जिले के लिए गौरव की बात होगी। उन्होंने चिंता जताई कि आज भी कई लोग नर्मदा नदी में कपड़े धोते हैं और साबुन का प्रयोग करते हैं, जो माँ नर्मदा की निर्मलता के लिए गंभीर खतरा है। मैया अभियान के सदस्यों ने जल संरक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में गर्मी के मौसम में पानी के लिए लोग त्रस्त हैं, जहाँ एक टैंकर पानी तीन हजार रुपये तक में मिल रहा है, जबकि डिंडोरी शहर माँ नर्मदा नदी के तट पर बसा होने के कारण यहाँ सदैव नर्मदा जल उपलब्ध रहता है। ऐसे में यह हम सभी का प्रथम कर्तव्य है कि आने वाले गर्मी के मौसम को देखते हुए मां नर्मदा की निर्मल और अविरल धारा बनाए रखें।
पर्यावरण चेतना को लेकर भी पहल
रविवार को आयोजित इस स्वच्छता अभियान में नेहरू युवा केन्द्र से आर.पी. कुशवाहा, शिक्षक शाहिद खान, डॉ. संतोष परस्ते, जिला आयुष अधिकारी महेंद्र उचेहरा, महाराणा प्रताप सिंह, माही बरोतिया, जगदीश सिंह सैयाम सहित अनेक जागरूक नागरिक एवं स्वयंसेवक शामिल हुए। मैया अभियान धीरे-धीरे न केवल स्वच्छता कार्यक्रम, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनता जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए माँ नर्मदा को सुरक्षित रखने का संदेश दे रहा है।


