डिंडौरी/शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ जिले के अमरपुर क्षेत्र में स्कूली बच्चों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के ऑटो में लटकाकर ले जाने का गंभीर मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। सुबह स्कूल समय और दोपहर छुट्टी के दौरान अमरपुर से गुजरने वाली सड़कों पर यह दृश्य आम हो चुका है कि छोटे-छोटे बच्चे ऑटो की पीछे लगी पकड़ या साइड से लटककर सफर करते दिखाई देते हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और किसी बड़ी दुर्घटना की ओर संकेत करती है।
परिवहन नियमों की अनदेखी
परिवहन नियमों के अनुसार किसी भी ऑटो में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना पूरी तरह अवैध है। लेकिन अमरपुर क्षेत्र में इन नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। कई ऑटो चालक 6–7 बच्चों की क्षमता वाले वाहन में 15–18 बच्चों को ठूंस देते हैं। सीटें भर जाने के बाद भी बच्चों को बाहर लटककर सफर करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने दी जानकारी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जोखिम प्रतिदिन बढ़ रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई अब तक देखने को नहीं मिली है। स्कूल प्रबंधन भी इस स्थिति से पूरी तरह वाकिफ है, फिर भी सुरक्षित वाहन की व्यवस्था नहीं की जाती। कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होने से वे मजबूरी में बच्चों को ऐसे असुरक्षित ऑटो में भेजते हैं।
बड़े हादसे का संकेत
स्पष्ट है कि बच्चों को इस तरह जोखिम में डालना किसी भी दिन बड़े हादसे का रूप ले सकता है। अक्सर देखा जाता है कि दुर्घटना होने के बाद ही प्रशासन सक्रिय होता है, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका होता है। ऐसे में सवाल उठता है “अगर कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदार कौन—ऑटो चालक, स्कूल प्रबंधन या जिला प्रशासन?”
चालानी कार्रवाई का नहीं भय
परिवहन विभाग समय-समय पर चालानी अभियान चलाने की बातें जरूर करता है, लेकिन अमरपुर क्षेत्र में इनका कोई वास्तविक असर दिखाई नहीं देता। अधिकांश ऑटो चालक बिना किसी भय के क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर रोजाना सड़क पर वाहन दौड़ा रहे हैं।
क्या कहते हैं नियम?
स्कूली बच्चों के परिवहन के लिए मोटर व्हीकल एक्ट और परिवहन विभाग की गाइडलाइन के अनुसार—
क्षमता से अधिक बच्चे ले जाना अवैध
6–7 सीट वाले ऑटो में 15–18 बच्चों को बैठाना या बाहर लटकाकर ले जाना कानूनन अपराध है।
लटककर सफर कराना खतरनाक ड्राइविंग
बच्चों को दरवाजे, साइड या पीछे पकड़कर ले जाना धारा 184 व 279 के तहत दंडनीय है।
फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट अनिवार्य
स्कूल वाहन के पास फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट, बीमा और PUC होना आवश्यक है।
चालक के लिए अनिवार्य योग्यता
कम से कम 5 वर्ष का अनुभव, वैध लाइसेंस और पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है।
स्कूल और प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी
स्कूल सुरक्षित वाहन सुनिश्चित करे और प्रशासन नियमित जांच अभियान चलाए।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई
वाहन जब्त
भारी जुर्माना
ड्राइवर का लाइसेंस निलंबित
IPC 279 व 336 के तहत मामला दर्ज


