डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ Dindori Weather: मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले और आसपास के अंचलों में शुक्रवार की शाम प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। पिछले कई दिनों से जारी भीषण और चिलचिलाती गर्मी के बीच अचानक मौसम ने ऐसी करवट ली कि चंद मिनटों में ही पूरा नजारा ही बदल गया। जिले में अचानक आए तीव्र चक्रवाती तूफान और उसके बाद हुई मूसलाधार बारिश ने एक तरफ जहां झुलसते लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दी, वहीं दूसरी तरफ तेज हवाओं के थपेड़ों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। आंधी-तूफान की रफ्तार इतनी तेज थी कि देखते ही देखते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
काले बादल छाने लगे
मौसम विभाग और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 5:00 बजे सबसे पहले शाहपुरा और मेहदवानी विकासखंड के क्षेत्रों में घने काले बादल छाने लगे और ठंडी हवाएं चलने लगीं। देखते ही देखते मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ गया। इसके बाद शाम लगभग 6:30 बजे इस चक्रवाती आंधी-तूफान ने डिंडौरी जिला मुख्यालय और ग्रामीण इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।
70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही आंधी
तूफान के दौरान हवा की रफ्तार इतनी भयानक थी कि वह 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही थी। तेज धूलभरी आंधी के कारण चारों तरफ धूल का गुबार छा गया, जिससे सड़कों पर दृश्यता घटकर शून्य के करीब पहुंच गई। इस स्थिति में राष्ट्रीय राजमार्ग और मुख्य मार्गों पर चल रहे वाहनों के पहिए जहां के तहां थम गए।
दुर्घटना की आशंका को देखते हुए वाहन चालकों को अपने वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़े । आंधी के तुरंत बाद बादलों की गड़गड़ाहट के साथ मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हुआ। करीब आधे घंटे तक हुई इस झमाझम तेज बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण मुख्य चौक-चौराहों और अंदरूनी सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, जिससे राहगीरों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
टीन शेड हवा में ताश के पत्तों की तरह उड़ गए
स्थानीय निवासी ने बताया कि तूफान का असर इतना तगड़ा था कि सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में लगी छोटी दुकानों के टीन शेड हवा में ताश के पत्तों की तरह उड़ गए। शहर के कई हिस्सों और ग्रामीण अंचलों में विशालकाय पेड़ों की डालियां टूटकर बिजली के तारों और सड़कों पर गिर गईं। कई जगहों पर पेड़ गिरने की भी खबर हैं। पेड़ गिरने से कई मुख्य रास्ते बंद हो गए, जिससे यातायात घंटों तक प्रभावित रहा।
तेज आंधी और पेड़ों के गिरने से विद्युत वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
ग्रामीण इलाकों की बिजली गुल
सुरक्षा के लिहाज से और कई जगहों पर लाइनें टूटने के कारण जिला मुख्यालय सहित दर्जनों ग्रामीण इलाकों की बिजली गुल हो गई। पूरा इलाका अचानक घने अंधेरे में डूब गया। हालांकि, चक्रवात और बारिश का वेग कम होते ही बिजली विभाग के लाइनमैन और तकनीकी टीमें सक्रिय हो गईं और शाम 6 बजे की गई लाईट देर रात 2 बजे तक आ पाई। फाल्ट सुधारने तथा आपूर्ति बहाल करने का कार्य युद्धस्तर पर चलता रहा।कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली दूसरे दिन सुबह 8 बजे तक बहाल न हो सकीं।
मौसम विभाग का कहना
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बारिश और ठंडी हवाओं के चलते जिले के तापमान में लगभग 6 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की गई है। शाम होते-होते मौसम बेहद सुहावना और ठंडा हो गया, किंतु इतनी बारिश होने के बाबजूद उमस में कोई कमी नहीं आयीं। रात्रि में लाईट न होने के कारण बहुत से लोग सड़कों पर टहलते नजर आयें।


