डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ विश्व एड्स दिवस के अवसर पर सोमवार सुबह जिला अस्पताल प्रांगण जागरूकता के रंग में रंग गया। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत यहां रैली एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और स्वयंसेवक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
रैली को मिली हरी झंडी
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10:30 बजे हुई, जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज पांडे ने हरी झंडी दिखाकर जागरूकता रैली रवाना की। रैली अस्पताल परिसर से निकलकर जगदंबा मंदिर मार्ग होते हुए पुनः लौटकर अस्पताल में ही संपन्न हुई। इसमें युवाओं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
एचआईवी/एड्स छुपा हुआ शत्रु — केसरवानी
कार्यक्रम की अध्यक्षता आशीष कुमार केसरवानी, न्यायिक अधिकारी/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डिंडौरी ने की। उन्होंने कहा कि “एचआईवी/एड्स एक छुपा हुआ शत्रु है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे खत्म करता है। इससे बचाव का सबसे बड़ा रास्ता है जागरूकता।” उन्होंने नागरिकों से सुरक्षित व्यवहार अपनाने, संक्रमण की आशंका होने पर तुरंत जांच कराने और अफवाहों से बचने की अपील की।
निःशुल्क और गोपनीय जाच — डॉ. पांडे
सीएमएचओ डॉ. मनोज पांडे ने बताया कि जिले में गर्भवती महिलाओं, टीबी रोगी, यौन रोग से पीड़ित व्यक्ति और गंभीर मरीज की गोपनीय और निःशुल्क एचआईवी जांच सरकारी अस्पतालों में की जाती है। उन्होंने कहा कि जांच से जुड़ी सभी सूचनाएं पूरी तरह गोपनीय रखी जाती हैं और सरकार द्वारा इन श्रेणियों में अनिवार्य परीक्षण के लिए कड़े नियम लागू हैं।
2006 से अब तक 498 मरीज मिले
जिला एड्स नोडल अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2006 से अब तक 498 एचआईवी संक्रमित मरीज जिले में पाए गए हैं। इन सभी का उपचार व नियमित मॉनिटरिंग आईसीटीसी/एफआईसीटीसी केंद्रों में किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्देश्य
कार्यशाला में एचआईवी संक्रमण के लक्षण, बचाव, उपचार, मिथकों और भ्रांतियों के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई। जिसमें स्वास्थ्य विभाग का मुख्य लक्ष्य — “जागरूकता के माध्यम से संक्रमण रोकना और संक्रमित व्यक्तियों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना” बताया गया।
