शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ डिंडोरी/ मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में जन समस्याओं के निराकरण को लेकर प्रशासनिक सख्ती के बावजूद जल संसाधन विभाग अपनी कार्यप्रणाली सुधारने में पूरी तरह नाकाम रहा है। हाल ही में जारी हुई जिला स्तरीय समीक्षा रिपोर्ट ने विभाग की पोल खोल कर रख दी है। जिले के कुल 29 सरकारी विभागों की रेस में जल संसाधन विभाग सबसे निचले पायदान पर रहा है, जिसे प्रशासन ने बेहद शर्मनाक माना है।

मात्र 58.86% स्कोर और D ग्रेड की बदनामी
समीक्षा रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतों के निपटारे में जल संसाधन विभाग ने मात्र 58.86 प्रतिशत का वेटेज स्कोर प्राप्त किया है। इस लचर प्रदर्शन के कारण विभाग को प्रदर्शन की सबसे निचली श्रेणी यानी D ग्रेड में रखा गया है। 29 विभागों की सूची में सबसे अंतिम स्थान पर होना यह स्पष्ट करता है कि विभाग आम जनता की समस्याओं के प्रति कितना संवेदनहीन और लापरवाह बना हुआ है।
EE एस.के. शर्मा की मुश्किलें बढ़ीं
इस भारी गिरावट और विभागीय सुस्ती के लिए सीधे तौर पर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री (EE) एस.के. शर्मा को जिम्मेदार माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों ने समय-सीमा (TL) की बैठकों में कई बार शर्मा को कार्यशैली सुधारने की चेतावनी दी थी। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं दिखा। शिकायतों का अंबार लगा रहा और अधिकारी फाइलों को दबाए बैठे रहे।
कारण बताओ नोटिस को भी किया नजरअंदाज
प्रशासनिक अनुशासनहीनता का आलम यह है कि पूर्व में जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का जवाब देना भी कार्यपालन यंत्री ने उचित नहीं समझा। समय-सीमा बीत जाने के बाद भी स्पष्टीकरण न देना वरिष्ठ अधिकारियों की अवमानना और घोर अनुशासनहीनता माना जा रहा है। सीएम हेल्पलाइन जैसे संवेदनशील मंच पर आम नागरिकों की समस्याओं को लटकाए रखना अब विभाग के लिए भारी पड़ने वाला है।
बड़ी कार्रवाई के संकेत
शासन अब इस मामले में कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही के मूड में है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विभाग के भीतर एक बड़ी सर्जरी (बड़ा फेरबदल) देखने को मिल सकती है। इस सख्त रुख से जिले के अन्य विभागों में भी हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि जनहित के कार्यों में कोताही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग प्रमुख की होगी।


