Tuesday, November 3, 2026
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इंजीनियर दिवस 2026: CM मोहन यादव ने बेहतर काम करने वाले इंजीनियरों का किया सम्मान, जानिए क्या है उनके नाम

इंजीनियर दिवस 2026: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ‘राज्य स्तरीय अभियंता दिवस समारोह’ में बेहतर काम करने वाले इंजीनियरों को सम्मानित किया। इनमें – ईश्वर सिंह चंदेली, मानवेंद्र सिंह सेंगर, मनीष कुमार शर्मा, अर्चित लाहौटी, अमन अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, नितिन बरसैया, राजेश दायमा, शशांक शर्मा,

हर्षिता वार्ष्णेय, दीपक नामदेव, साहित्य तिवारी, अनिल श्रीवास्तव, पुष्कल प्रताप, मोहन किशोर, महेंद्र डोलिया, शिवेंद्र सिंह, रामसिंह रघुवंशी, आशीष मंडल का सम्मान किया गया। इस दौरान सेवानिवृत्त सचिव लोक निर्माण विभाग सतीश चंद्र पांडे और सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता जीएस पल्नितकर को विशेष सम्मान दिया गया।

कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव ने मौजूद इंजीनियरों ने कहा कि राज्य सरकार उनके कल्याण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार की योजनाओं से जनता को लाभ हुआ है। इस दौरान सीएसआईआर, एम्प्री भोपाल और मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए एमओयू किया गया। यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है। इसमें फ्लायऐश आधारित सीमेंट से सड़कें बनाई जाएंगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 19-20वीं शताब्दी के दरम्यान हमारी सारी प्रतिभाएं देश को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रकार की राह बना रही थीं। उनमें एक महान शख्सियत मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ शानदार जीवन जीया। उन्होंने कई विख्यात संरचनाएं बनाईं। उनकी एक-एक रचना उनकी सोच को दर्शाती है।

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 सितंबर को जन्म दिवस है। उनके नेतृत्व में भारत आर्थिक ताकत बनकर उभरा है। आज शासन के विभाग आत्मविश्वास के साथ अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियर में मुझे इंजन शब्द का आभास होता है।

इंजन का अर्थ ही यही है कि जो सारी ताकत और क्षमता लगाकर संचालन करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुराने समय में बड़े-बड़े भवन, बड़ी-बड़ी अट्टालिकाएं, बड़ी-बड़ी रचनाएं, अजंता-एलोरा का भगवान कैलाश का मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर, दिव्य प्रतिमाएं हमें प्राचीन की कला और कौशल याद दिलाती हैं।

भारत की पहली संसद प्रदेश के मुरैना के पास के स्थान से प्रेरणा लेकर बनाई गई। आजादी के बाद जो दूसरा संसद भवन बना उसकी प्रेरणा भी विदिशा जिले के पास के बिजासन मंदिर से ली गई। उन्होंने कहा कि हमारी रचनाएं हजारों साल पुरानी हैं। इन रचनाओं में महान विभूतियों की कला साधना छिपी हुई है।

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