झाबुआ/ नावेद रजा/ खबर डिजिटल/गरीबों के लिए शासन-प्रशासन की बड़ी योजनाएं और मुफ्त राशन की घोषणाएं जमीनी हकीकत पर अक्सर सवाल खड़े कर देती हैं। ऐसा ही मामला झाबुआ जिले के पेटलावद जनपद की ग्राम पंचायत डाबड़ी के कचनारिया गांव में सामने आया, जहां सरकारी राशन वितरण की असलियत उजागर हुई।गांव के गरीब परिवारों को खाने योग्य अनाज की जगह कंकर और चावल मिला हुआ गेहूं वितरित किया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि इस हालत का गेहूं तो पशु भी खाने से इनकार कर देंगे। उन्होंने इसे गरीबों के साथ “यातना” बताते हुए जमकर आक्रोश जताया।कचनारिया गांव के कांतिलाल चारेले ने सवाल उठाया – “सरकार कहती है कि गरीबों को भरपेट खाना मिलेगा, लेकिन यह कैसा राशन है जिसे देख कर भूख और बढ़ जाए?”ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और भविष्य में साफ-सुथरा व गुणवत्ता युक्त अनाज उपलब्ध कराने की मांग की। लोगों ने कहा कि गरीबों के लिए मुफ्त राशन राहत बनना चाहिए, बोझ नहीं।


