छिंदवाड़ा/तौफीक मिस्कीनी/खबर डिजिटल/ छिंदवाड़ा वो इलाका जिसे कभी कांग्रेस के अभेद किले के रुप में जाना जाता था, लेकिन कमलनाथ के इस सियासी दुर्ग में सेंधमारी हो चुकी है, बीजेपी ने उनके बेटे नकुलनाथ को लोकसभा चुनाव हराकर नए समीकरण खड़े कर दिए थे। बीजेपी के टिकट पर लोकसभा सांसद विवेक ‘बंटी’ साहू को फतह हासिल हुई, लेकिन उसके बाद बीजेपी में ही खटपट की खबरें सामने आ रही है, जिसको लेकर पार्टी के आलाकमान की नजर अभी से ही पड़ गई है। स्थानीय नेताओं की रिपोर्ट के बाद पार्टी संगठन को पता चल गया कि लोकसभा सांसद विवेक ‘बंटी’ साहू और जिला अध्यक्ष शेषराव यादव के बीच कुछ अच्छा नहीं चल रहा।
बीजेपी आलाकमान ने दोनों नेताओं को किया तलब
छिंदवाड़ा बीजेपी के लिए बताया जा रहा है कि वहां पर भाजपा में आंतरिक कलह चरम पर पहुंच गया है। लोकसभा सांसद विवेक ‘बंटी’ साहू और जिला अध्यक्ष शेषराव यादव के बीच जमकर ठनी है, शह और मात के खेल शुरु हो जाए, उसके पहले ही पार्टी आलाकमान ने दोनों को भोपाल तलब कर लिया। बीजेपी के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने दोनों नेताओं को भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में बुलवाया। दोनों को साथ बैठाकर बातचीत कराई गई और पार्टी की एकता बनाए रखने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया।

छिंदवाड़ा बीजेपी आखिर ये क्या हो रहा था?
छिंदवाड़ा जिले में भाजपा की जिला इकाई में लंबे समय से गुटबाजी की बात निकलकर सामने आ रही थी। सांसद बंटी साहू और जिलाध्यक्ष शेषराव यादव के बीच मतभेद खुलकर सामने दिखाई दे रहे थे। जिलाध्यक्ष की बैठकों में सांसद शामिल नहीं हो रहे थे, तो शेषराव यादव सांसद के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे। वहीं यह विवाद तब और भी गहरा गया, जब जिला कार्यकारिणी गठन, पदों के बंटवारे और संगठनात्मक फैसलों की बात आई।
बीजेपी मुख्यालय से दी गई सख्त चेतावनी
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने छिंदवाड़ा के दोनों ही नेताओं को सख्त चेतावनी जारी की है कि पार्टी ने लंबे संघर्ष के बाद छिंदवाड़ा में सफलता हासिल की है, लेकिन वर्तमान स्थिति पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। दोनों को पार्टी हित में मतभेद भुलाकर एकजुट काम करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने भी मध्यस्थता कर खींचतान को खत्म करने की सख्त चेतावनी दी। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, बैठक सकारात्मक रही और दोनों नेताओं ने पार्टी के निर्देश मानने का आश्वासन दिया है।
क्या यही कमलनाथ के लिए सही मौका
छिंदवाड़ा बीजेपी में मची खींचतान के मौके पर एक बार कमलनाथ को मौका मिल गया है, वो एक बार फिर खोई जमीन तलाश सकते हैं, जिसके लिए उनकी सक्रियता भी पिछले दिनों देखने को मिली थी, वो कुछ कार्यक्रमों में खुलकर सामने आ रहे थे, साथ ही नकुलनाथ भी अपनी सक्रियता दिखा रहे है। हालांकि कांग्रेस के सामने भी हमेशा से चुनौती रही है कि बीजेपी से ज्यादा उनके बीच गुटबाजी होती है, उसे थामने के लिए भी कमलनाथ अब कोई एक्शन प्लान के साथ आगे बढ़ सकते हैं, कुल मिलाकर कहें तो छिंदवाड़ा की सियासत कभी भी करवट बदल सकती है।


