राकेश यादव/ खबर डिजिटल/सिवनी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सिवनी में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और शासन के बीच समन्वय पर गंभीर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु सरकारी जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में मीडिया की अहम भूमिका रही। वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि धरातल पर योजनाओं की सफलता का श्रेय पत्रकारों को जाता है, जो असली हीरो की तरह सूचनाओं का प्रसार करते हैं।
प्रशासन और जनता के बीच मजबूत सेतु
कार्यशाला को संबोधित करते हुए विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि कोई भी योजना तब तक सफल नहीं मानी जा सकती, जब तक उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक न पहुंच जाए। मीडिया इस प्रक्रिया में एक मजबूत सेतु का कार्य करता है। अधिकारियों ने पत्रकारों की सजगता की सराहना करते हुए कहा कि मीडिया के माध्यम से ही शासन को जमीनी हकीकत और जनता की प्रतिक्रिया का पता चलता है, जिससे नीतियों में सुधार संभव होता है।
तथ्यात्मक और सकारात्मक पत्रकारिता पर जोर
चर्चा के दौरान पत्रकारों से आह्वान किया गया कि वे योजनाओं से जुड़ी जानकारियों को पूरी सटीकता और तथ्यों के साथ प्रस्तुत करें। भ्रामक सूचनाओं के दौर में पत्रकारों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है कि वे केवल प्रमाणित और लाभकारी विवरण ही जनता तक पहुंचाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव में लाभ से वंचित न रह जाए।
पत्रकारों का संकल्प और अनुभव साझाकरण
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में स्थानीय पत्रकारों ने अपने कार्यक्षेत्र के अनुभव साझा किए। उन्होंने उन चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला जो ग्रामीण अंचलों में सूचना पहुंचाने के दौरान आती हैं। उपस्थित सभी मीडियाकर्मियों ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए सकारात्मक और विकासात्मक पत्रकारिता को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया। यह कार्यशाला न केवल सूचनाप्रद रही, बल्कि मीडिया और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुई।


