सिवनी/खबर डिजिटल/ प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के बड़े-बड़े दावों के बीच सिवनी मेडिकल कॉलेज से एक बेहद चौंकाने वाली और विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां मानवता की सेवा करने वाले प्रोफेसर डॉक्टरों के सामने खुद के जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। पिछले 10 महीनों से वेतन न मिलने और 20 महीनों से नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) के भुगतान न होने से नाराज डॉक्टरों का सब्र अब जवाब दे गया है।
प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ता भविष्य
कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. लता महतो ने इस गंभीर संकट पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्थिति केवल आर्थिक तंगी तक सीमित नहीं है। वेतन और भत्तों के साथ-साथ डॉक्टरों की कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट (CR) भी नहीं भरी जा रही है। इसका सीधा असर उनके भविष्य के प्रमोशन और प्रोबेशन पीरियड पर पड़ रहा है। एक तरफ जहां डॉक्टरों से दिन-रात काम लिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक फाइलों में उनका भविष्य धूल फांक रहा है।
इस्तीफों का दौर और कॉलेज की गिरती साख
लंबे समय से मिल रहे खोखले आश्वासनों से तंग आकर कई विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कॉलेज से इस्तीफा दे दिया है। डॉक्टरों के जाने से मेडिकल कॉलेज में रिक्त पदों की संख्या बढ़ गई है, जिसका सीधा असर मरीजों के इलाज और मेडिकल छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन हर बार ‘जल्द समाधान’ का राग अलापता है, लेकिन धरातल पर अब तक फूटी कौड़ी भी डॉक्टरों के खाते में नहीं पहुंची है।
हाईकोर्ट सख्त, सरकार मौन
इस मामले की गूंज अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है। माननीय न्यायालय ने डॉक्टरों को वेतन न मिलने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है और राज्य सरकार से इस विफलता पर जवाब मांगा है। अदालत की फटकार के बावजूद, सरकार और संबंधित विभाग अब तक किसी ठोस समाधान पर नहीं पहुंच पाए हैं।
यदि समय रहते इन डॉक्टरों की मांगों को पूरा नहीं किया गया और उनके बकाया का भुगतान नहीं हुआ, तो वह दिन दूर नहीं जब सिवनी मेडिकल कॉलेज केवल एक खाली इमारत बनकर रह जाएगा। सवाल यह उठता है कि क्या सरकार को आम जनता के स्वास्थ्य और इन विशेषज्ञों के सम्मान की कोई चिंता है?


