सिवनी/ विशाल भारद्वाज/ खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश मेडिकल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन (MPMSRU) के आह्वान पर 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल के अंतर्गत सिवनी में दवा प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार की नई ‘उदारवादी कॉर्पोरेट परस्त’ नीतियों और श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं के खिलाफ एकजुट होकर कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
श्रमिक विरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध
यूनियन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केंद्र की चारों नई श्रम संहिताएं काली संहिताएं हैं, जो पूरी तरह से कॉर्पोरेट घरानों के हित में और श्रमिकों के खिलाफ हैं। प्रदर्शनकारियों ने बेतहाशा बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के लिए सरकार की जनविरोधी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उनकी मुख्य मांग है कि इन चारों श्रम संहिताओं को तत्काल रद्द कर सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉई एक्ट 1976′ (SPE Act) को पूर्णतः बहाल किया जाए।
कार्यस्थल पर सम्मान और अधिकारों की मांग
ज्ञापन में दवा प्रतिनिधियों (MRs) के लिए वैधानिक कार्य नियमावली बनाने और सरकारी अस्पतालों व चिकित्सा संस्थानों में उनके प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग की गई है। यूनियन ने कार्य के अधिकार को सुनिश्चित करने के साथ-साथ निम्नलिखित मांगें भी रखीं:
दवा प्रतिनिधियों के लिए न्यूनतम वेतन घोषित किया जाए।
काम के घंटे स्पष्ट रूप से 8 घंटे तय हों।
सेल्स टारगेट के नाम पर कर्मियों का मानसिक दमन और उत्पीड़न बंद हो।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के माध्यम से की जा रही अवैध निगरानी को तुरंत रोका जाए।
दवा प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो यह आंदोलन भविष्य में और उग्र रूप धारण करेगा।
