कटनी(सौरभ श्रीवास्तव) सूत्रों के मुताबिक दो साल से शासकीय मेडिकल कॉलेज का सपना दिखाने के बाद अचानक इसे पीपीपी मोड पर घोषित कर दिया गया और महज़ दो दिन में एमओयू हो गया। जनता और स्थानीय नेताओं में सवाल खड़े हैं—विवेकानंद फाउंडेशन आखिर कहां से प्रकट हुआ और इसके मालिक कौन हैं?क्या इस फाउंडेशन का सत्ता पक्ष से नज़दीकी संबंध है?
इतने कम समय में निर्णय और एमओयू कैसे संभव हुआ?टेंडर और पारदर्शी प्रक्रिया की जगह अचानक साझेदारी क्यों?कटनी की जनता अब केवल घोषणाओं पर भरोसा नहीं कर सकती। वे चाहते हैं—एमओयू और साझेदारी की पूरी जानकारी सार्वजनिक हो, और भविष्य में ऐसे फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।जनता का मानना है: बिना जवाब के और बिना स्पष्ट प्रक्रिया के यह केवल छलावे जैसा कदम है।
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