Tuesday, November 3, 2026
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“जमीन हड़पने का खेल! खसरे से गायब हुआ असली मालिक का नाम, पटवारी-आरआई पर रिश्वत मांगने का आरोप”

खबर डिजिटल संवाददाता कटनी –जिले की रीठी तहसील के ग्राम खम्हरिया नंबर-2 में जमीन विवाद का मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। पीड़ित मनोज यादव, गणेश यादव और अनेश यादव ने आरोप लगाया है कि उनकी वर्ष 2017 में खरीदी गई जमीन के रिकॉर्ड में बिना सूचना दिए दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए।पीड़ितों के अनुसार खसरा नंबर 867 रकबा 0.0700 हेक्टेयर भूमि उन्होंने वर्ष 2017 में रामभजन यादव से विधिवत रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदी थी। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण और भू-अभिलेखों में भी उनका नाम दर्ज हो गया था। परिवार का कहना है कि कई वर्षों तक खसरे में उनका नाम दर्ज रहा, लेकिन वर्ष 2025-26 में अचानक रिकॉर्ड बदल गया और अन्य लोगों के नाम चढ़ा दिए गए।शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि हल्का नंबर 52 के पटवारी सचिन श्रीवास्तव और आरआई दिलीप त्रिसोलिया ने बिना किसी वैधानिक सूचना और बिना पुराने दस्तावेजों की जांच किए रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया। पीड़ितों का दावा है कि उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार और कलेक्टर तक शिकायत पहुंचाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।मामले में नया मोड़ तब आया जब बिलहरी नायब तहसीलदार अनुराधा सिंह द्वारा सीमांकन के आदेश जारी किए गए। आरोप है कि सीमांकन के दौरान जब पीड़ित परिवार ने पटवारी और आरआई से पूछा कि “जब 2017 से रिकॉर्ड में हमारा नाम था तो फिर दूसरे लोगों का नाम कैसे दर्ज हो गया?” तब मौके पर मौजूद अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।पीड़ित परिवार ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि रिकॉर्ड दोबारा ठीक कराने के नाम पर उनसे दो लाख रुपये की मांग की गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित राजस्व घोटाले का मामला हो सकता है।दस्तावेजों के अनुसार 11 जुलाई 2017 को पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से उक्त भूमि मनोज यादव, गणेश यादव और अनेश यादव के नाम विक्रय की गई थी। वहीं बाद में राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन कर भगवत यादव, सियाबाई, कृष्ण कुमार सहित अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए। इसी आदेश को चुनौती देते हुए पीड़ित पक्ष ने कलेक्टर न्यायालय में प्रथम राजस्व अपील भी दायर की है।पीड़ितों का आरोप है कि बिना सुनवाई का अवसर दिए और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना आदेश पारित किया गया। वहीं राजस्व विभाग की शिकायत प्रणाली में भी इस मामले को “अभिलेख दुरुस्ती” बताते हुए बंद कर दिया गया, जबकि शिकायतकर्ता लगातार इसे फर्जीवाड़ा बता रहे हैं।अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर वर्षों पुराने नामांतरण और रजिस्ट्री रिकॉर्ड को किस आधार पर बदला गया? क्या संबंधित अधिकारियों ने नियमों का पालन किया या फिर मिलीभगत से पूरा खेल हुआ? अगर पीड़ितों के आरोप सही हैं तो यह मामला केवल एक जमीन विवाद नहीं बल्कि राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की आशंका को भी उजागर करता है।फिलहाल पीड़ित परिवार प्रशासन से निष्पक्ष जांच, पुराने रिकॉर्ड बहाल करने और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।इनका कहना है मामला संज्ञान मे इसकी जाँच की जाएगी और जो भी उचित कार्यवाही हो गी की जाएगी नायब तहसीलदार अनुराधा सिंह तहसीलदार बिलहरी कटनी

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