भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग का मध्यप्रदेश के किसानों पर भी असर पड़ता नजर आ रहा है, क्योंकि रमजान के महीने में एमपी के कई किसानों की फसलों की सप्लाई करने का वक्त शुरु हो जाता है, लेकिन युद्ध के कारण सारा व्यापार ही ठप हो चुका है, बड़वानी और आसपास के जिलों के केला किसानों की कमर तोड़ दी है, जहां निर्यात ठप होने से फसल खेतों और बंदरगाहों पर सड़ रही है। इसके कारण व्यापारियों समेत किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही है।
ईरान ने बंद किया होर्मुज स्ट्रेट
अमेरिका-इजराइल और ईरान के वॉर बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है। युद्ध के बीच इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों के सामान मिडिल ईस्ट के देशों में पहुंचते हैं। इनमें भारत भी शामिल है, लेकिन मध्यप्रदेश से रमजान के त्योहार पर केला सबसे ज्यादा निर्यात किया जाता है, लेकिन हालात ठीक नहीं होने के चलते केला उत्पादक किसान और व्यापारी चिंता में हैं। भाव सही न मिलने से खेतों में ही केला सड़ने की नौबत आ गई है, क्योंकि सप्लाई चेन पूरी तरह से बाधित हो गई है।
एमपी में भरपूर केले की खेती
रमजान के महीने में केले के उचित दाम मिलना शुरु होते हैं, जिसके चलते किसानों में उत्साह दिखाई देता है, कुछ दिन पहले केले के दाम 2200 रुपए प्रति क्विंटल थे, जोकि अब गिरकर अचानक 1200 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित बड़वानी, बुरहानपुर, धार और खरगोन के किसान-व्यापारी हो रहे हैं। वहीं, चावल के कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि फिलहाल मुंबई पोर्ट पर माल फंसा होने के चलते नए ऑर्डर कैंसिल होने की कगार पर है। जिसके कारण आने वाले वक्त में किसानों और व्यापारियों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कीमत में गिरावट के बाद 20 दिन के स्टॉक बाकी
जानकारी के मुताबिक युद्ध के कारण केले की कीमतों में गिरावट आई है। पहले जहां केले का भाव 2 हजार 2200 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा था, वह अब घटकर 1200 से 1300 रुपए प्रति क्विंटल रह गया है, जो केला बंदरगाहों पर ईरान और अन्य देशों के लिए पैक होकर तैयार था, उसको अब औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। व्यापारियों के मुताबिक मुंबई के शिपयार्ड में करीब 15 से 20 दिन का केला स्टॉक पड़ा है। निर्यात रुकने के कारण यह माल घरेलू बाजार में उतारा जा रहा है, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ गया है।


