मध्य प्रदेश भाजपा में कुछ समय पहले तक निगम मंडलों, विकास प्राधिकरणों और विभिन्न आयोगों में तेजी से राजनीतिक नियुक्तियां की जा रही थीं. पार्टी ने एक के बाद एक करीब 60 से अधिक पदों पर नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी थीं. लेकिन अचानक इस प्रक्रिया पर विराम लग गया. शुरुआत में इसकी वजह पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों को माना गया, लेकिन अब इसके पीछे एक और बड़ी वजह सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बाद पार्टी संगठन ने सख्ती दिखाई है. दरअसल राजनीतिक नियुक्ति मिलने के बाद कई भाजपा नेता बड़ी संख्या में वाहनों के काफिले के साथ शक्ति प्रदर्शन करते हुए भोपाल पहुंचे थे. यह प्रदर्शन पार्टी की अनुशासन व्यवस्था और सादगी के संदेश के खिलाफ माना गया. इसके बाद संगठन ने सख्त रुख अपनाते हुए 17 से ज्यादा नेताओं पर कार्रवाई की. कुछ नेताओं को नोटिस जारी किए गए, जबकि कुछ से पद भी वापस ले लिए गए.
इस वजह से रूकी थी नियुक्ति
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने की अपील की थी. इसके बाद उन्होंने खुद अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम कर उदाहरण पेश किया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी तुरंत अपने वाहन काफिले को छोटा कर दिया. बावजूद इसके कई भाजपा नेताओं ने नियुक्ति मिलने के बाद सैकड़ों गाड़ियों के साथ रैली निकालकर पदभार ग्रहण किया. इससे पार्टी नेतृत्व नाराज हो गया.
जल्द शुरू होगा नियुक्तियों का सिलसिला
भाजपा संगठन को अब यह महसूस होने लगा है कि नियुक्तियों के साथ नेताओं द्वारा शक्ति प्रदर्शन और रैलियां निकालने का सिलसिला थमने वाला नहीं है. इसी कारण कुछ समय के लिए नई राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया रोक दी गई है. हालांकि मुख्यमंत्री मोहन यादव और क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल चाहते हैं कि जल्द ही नियुक्तियों का अगला दौर शुरू हो. इसके साथ नेताओं को साफ संदेश देने की तैयारी भी की जा रही है कि पदभार ग्रहण के दौरान किसी तरह का शक्ति प्रदर्शन या वाहन रैली स्वीकार नहीं की जाएगी.
नियुक्तियों पर रोल लगने से नेताओं को लगा है झटका
नियुक्तियों पर अचानक लगी रोक से उन नेताओं को बड़ा झटका लगा है जो लंबे समय से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. खासकर इंदौर के कई भाजपा नेता इस फैसले से नाराज बताए जा रहे हैं. उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही निगम मंडलों और आईडीए में उनके नामों की घोषणा होगी. लेकिन अंतिम समय में प्रक्रिया रुक जाने से उनके बीच असंतोष बढ़ गया है. इंदौर को अब तक राजनीतिक नियुक्तियों में अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिलने की चर्चा भी पार्टी के अंदर तेज हो गई है.
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