भोपाल/ खबर डिजिटल/ MP cabinet expansion: मध्यप्रदेश में लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट चल रही है। लेकिन अब वो दिन बहुत करीब आ गया है जब जल्द ही मध्यप्रदेश में नए मंत्रीयों के सिर पर मंत्री पद का ताज सजेगा। हाल ही प्रदेश के मुखिया मोहन यादव राजभवन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुलाकात की और फिर दिल्ली के लिए रवाना हो गए। नई मंत्रिमंडल की लिस्ट को लेकर अब अंतिम दौर चल रहा है। हालांकि यह अभी कंफर्म नहीं हो पाया है कि नए मंत्रीयों के नाम की घोषणा कब होगी, राजनीति के जानकार का कहना है कि बिहार चुनाव से मध्यप्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार से कोई लेना देना नहीं है।
कई दिनों से विधायकों को इंतजार
मोहन मंत्रिमंडल के विस्तार की कवायदों के बीच कई वरिष्ठ और सक्रिय विधायकों का बीजेपी कार्यालय की तरफ लगातार रुख दिखाई दे रहा है। बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के काफी कम समय में कार्यकारिणी के गठन के बाद से मंत्रिमंडल विस्तार का काउंटडाउन शुरु हो गया था, क्योंकि कहा जा रहा है कि संगठन में जगह नहीं मिलने वाले विधायकों को आने वाले वक्त में मोहन कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
मालवा-निमाड़ पर फोकस
वर्तमान में सारी कांग्रेस की लॉबी मालवा और निमाड़ से आ रही है, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इन्हीं अंचलों से आते हैं। पार्टी आलाकमान का भी इनको फुल सपोर्ट मिलता नजर आ रहा है, इसी का नतीजा है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में दोनों ही नेताओं की केमिस्ट्री दिखाई दी। बात करें सीटों की, तो प्रदेश में सबसे ज्यादा सीटें इसी अंचल से आती है, वो भी कुल 230 में से 66। बीजेपी की नजर अब इस अंचल पर खासतौर पर है और आने वाले वक्त में इन इलाकों से मंत्रियों की संख्या में इजाफा देखा जा सकता है।
जातिगत समीकरणों पर भी फोकस
ओबीसी आरक्षण में बढ़ोतरी की मांग के बीच बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा चुनौती पिछड़ा वर्ग के 52 प्रतिशत वोटर्स को साधने की भी है, हालांकि मुख्यमंत्री खुद ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, तो इस वर्ग से अबकी बार मंत्रिमंडल विस्तार में महज एक चेहरा देखने को मिल सकता है, वहीं विशेष परिस्थितियों में वो भी संभव नहीं है। इसी तरह EWS आरक्षण की कमियों को दूर करने के लिए सामान्य वर्ग के संगठनों के आंदोलन की राह पकड़ने के बाद इस वर्ग को भी साधने की कोशिश की झलक मंत्रिमंडल विस्तार में देखने को अवश्य मिलेगी। वहीं आरक्षित सीटों पर कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता को बैलेंस करने के लिए इस वर्ग से भी कोई मंत्री दिखाई दे सकता है।
वरिष्ठ विधायकों को मंत्री पद की आस
प्रदेश में कई वरिष्ठ विधायक टक-टकी लगाए बैठे हैं कि सालों से मंत्री और बड़े पद पर रहने के बावजूद अबकी बार उन्हें मंत्रिमंडल में मौका नहीं दिया गया, जिनकी नाराजगी को मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए दूर किया जा सकता है, इनमें वो नेता भी शामिल होंगे, जिनका यह आखिरी चुनाव माना जा रहा था। उनको ससम्मान मार्गदर्शक मंडल में जगह दी जा सकती है।
मोहन कैबिनेट में ये बन सकते हैं मंत्री
मंत्री पद की रेस में सबसे पहला नाम गोपाल भार्गव का लिया जा रहा है, वो नौ बार के विधायक हैं। उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सरकार में लगातार मंत्री रहे है। दूसरा नाम शिवराज सरकार में लगातार आठ वर्ष मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह का है, जोकि एक बार सांसद भी रहे हैं। अगला नाम जयंत मलैया का है वो आठ बार के विधायक और सुंदरलाल पटवा से लेकर शिवराज सरकार तक में मंत्री रहे हैं। इसी तरह ब्रजेंद्र प्रताप सिंह जोकि पांच बार के विधायक और दो बार मंत्री रह चुके हैं। उनको भी मंत्रिमंडल विस्तार का लाभ मिल सकता है। इनमें अगले नाम में संजय पाठक, हरिशंकर खटीक, रमेश मेंदोला, महेंद्र हार्डिया,कमलेश शाह का नाम शामिल है, जिन्हें मोहन मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार का कहना
“मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल फेरबदल के कयासों पर जल्द ही विराम लगने के संकेत है। ऐसा हुआ तो यह इस बात का भी संकेत माना जा सकता है कि बिहार का चुनाव परिणाम एनडीए के पक्ष में जा रहा है। सीएम की सक्रियता बढ़ गई है और मीडिया से उन्होंने फेरबदल के संबंध रिपोर्ट कार्ड की बात कह कर टाल दिया था। इस फेरबदल से मध्यप्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की खबर भी बेबुनियाद साबित हो रही है।”


