Mp congress Secret Plan : भोपाल/ सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेता बीजेपी सरकार की नीतियों का विरोध करने में पूरी जी-जान लगा रहे हैं, देखने में आ रहा है कि उनके चेहते पर कुछ कॉन्फिडेंस की लकीरें भी साफ दिखाई दे जाएगी, जिस तरह से पीसीसी चीफ कमलनाथ के रात्रि भोज में सभी विपक्षी दलों की तरह नहीं, कोई सत्ताधारी दल की तरह दिखाई दे रहे थे, जबकि बीजेपी के खेमे में वरिष्ठों और अन्य दलों से आए नेताओं की आमद के बाद अंदरखानों में काफी कुछ घट रहा है, जिसको मैनेज करने का काम सीएम डॉ. मोहन यादव और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बखूबी करने का प्रयास कर रहे हैं, वो समीक्षा और कार्यकर्ताओं को तवज्जों देकर पार्टी गाइडलाइन को एक सीध में चलाने में लगे हैं, ऐसे में शायद कांग्रेस गुपचुप एक सीक्रेट प्लान पर काम करती नजर आ रही है।
मध्यप्रदेश में किस वर्ग की कितनी हिस्सेदारी
देश के दिल मध्यप्रदेश की सियासत कुछ अलग ही चलती है, जहां अन्य प्रदेशों में जातिगत वोटों के आधार पर आकलन किया जाता है, पर एमपी में ऐसा नहीं है, यहां की आबोहवा कभी भी कुछ भी कर सकती है, जिसका परिणाम आज भी हम देख रहे हैं कि सालों तक सूबे में काबिज रही कांग्रेस सत्ता से दूर है, और इसी तरह से मन किया तो जनता ने कमलनाथ को सत्ताधारी दल के खिलाफ मुख्यमंत्री बना दिया था, इसको समझने के लिए जान लीजिए प्रदेश में कुल आबादी में करीब 52 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग, 21-22 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति यानि आदिवासी वर्ग, 16 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति वर्ग यानी दलित वर्ग की है, इनमें से दो एससी और एसटी वर्ग तो एक समय कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक हुआ करता था, इसी का नतीजा है कि बीजेपी ने अपनी सरकार आने पर प्रदेश में अब तक ओबीसी समुदाय से ही मुख्यमंत्री बनाया है। सूत्रों की माने तो इसी को ध्यान में रखकर कांग्रेस अभी से एक खास रणनीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस के पदाधिकारियों का गणित
मध्यप्रदेश कांग्रेस का मुख्य पदाधिकारियों की नियुक्ति अबकी बार काफी खास हो गई है, क्योंकि माना जा रहा है कि यही टीम आगामी विधानसभा चुनाव तक कायम रहेगी, जिसमें बात करें सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की, तो वो खाती, किसान और ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, साथ ही मालवा में सबसे ज्यादा सीटें भी है। इसी तरह नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार अनुसूचित जनजाति यानि आदिवासी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, और निमाड़ से आते हैं। वहीं हाल ही में नियुक्त युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यश लखन घनघोरिया और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रीना सेतिया अनुसूचित जाति वर्ग यानी दलित वर्ग से आते हैं, तो इससे समझ सकते हैं कि किस तरह से कांग्रेस की नजर इतने बड़े वोट बैंक पर बनी हुई है।
बीजेपी भी कर रही समरसता सम्मेलन
इस चुनौती को पार करने के लिए लगातार बीजेपी भी समरसता सम्मेलनों का सहारा ले रही, लेकिन आपस में आगामी चुनौतियों और भीड़ तंत्र से जुझती बीजेपी में इस फॉर्मूले का तोड़ निकालने का प्रयास जरुर करेगी। जिसके पीछे बताया जा रहा है कि निगम मंडल, एल्डरमैन, जनभागीदारी समिति में अध्यक्ष बनाकर नेताओं की नाराजगी को दूर किया जा सकता है।


