भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में लगातार सरकारी अमला घटता जा रहा है, सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया काफी ढीली होने के चलते कर्मचारियों की घटती संख्या को लेकर चिंता जताई जा चुकी है। हालिया आंकड़ों को मुताबिक पिछले एक साल में 3881 शासकीय कर्मचारी कम हो गए है। सबसे खास बात यह है कि जनता को आनंद देने वाले आनंद विभाग में तो महज एक ही कर्मचारी बचा है, तो बताईए भूटान को तरह बिना चिंता का प्रदेश बनाने का सपना कैसे साकार हो पाएगा।
पूर्व सीएम शिवराज ने की थी शुरुआत
आनंद विभाग की शुरुआत पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने की थी, इसका उद्देश्य लोगों के जीवन में सकारात्मक भाव और खुशहाली लाना था, लेकिन मौजूद स्थिति में इस विभाग के हालात ही आनंद दिलाने के विपरीत है, इस विभाग का ढांचा की सिमटकर रह गया है। इसके साथ ही पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभाग में भी स्थिति चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। प्रदेश के पर्यटन के प्रमोशन की जिम्मेदारी महज 8 कर्मचारियों पर है। निवेश, उद्योग और रोजगार से जुड़ी औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग में भी पूरे प्रदेश में सिर्फ 20 कर्मचारी कार्यरत है। सरकारी मशीनरी के सबसे बड़े कार्यालय वल्लभ भवन में संचालित कई विभागों में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के पद खाली बताए जा रहे हैं।
कुल नियमित कर्मचारियों में 30 प्रतिशत महिलाएं शेष
सरकारी संस्थानों और अर्धशासकीय सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की संख्या 2024 में 33 हजार 942 थी, जो 2025 में घटकर 30 हजार 495 रह गई। नगरीय निकायों में भी संख्या 29 हजार 966 हो गई। ग्रामीण स्थानीय निकायों में 5 हजार 422 से घटकर 5 हजार 384 कर्मचारी रह गए। विश्विविद्यालयों और विकास प्राधिकरणों में भी यही हाल है, आउटसोर्स कर्मचारियों के जरिए कामकाज पूरा किया जा रहा है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि 2024 में कर्मचारियों की संख्या 6 लाख 81 हजार 278 थी, जो 2025 में घटकर 6 लाख 77 हजार 397 रह गई। जिनमें कुल कर्मचारियों के मुकाबले 30 प्रतिशत महिला कर्मचारी है, जिन्हें अवकाश का अतिरिक्त लाभ दिया जाता है।


