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विश्व महिला दिवस: खुलते स्त्रियों के लिए बंद कपाट

Special article on International Women's Day 8 March

विश्व महिला दिवस 8 मार्च पर विशेष: International Women’s Day 2026 शक्तिकरण की दिशा में बीते वर्षों में जो कोशिशें हुई हैं, वह पूरे देश के लिए रोल मॉडल साबित हो रहा है. स्त्री समाज की नींव मजबूत करने के लिए जरूरी होता है कि उन्हें शिक्षित किया जाए और आर्थिक रूप से उन्हें सशक्त बनाया जाए. महिला सशक्तीकरण, सुरक्षा, सम्मान और समग्र विकास के अद्वितीय कोशिशों ने महिला समाज को उजास से भर दिया है.

शहरी इलाके होंं या गांव-पंचायत, सभी जगहों पर महिलाओं की बुलंद आवाज सुनाई देती है. राज्य के कोने-कोने में स्व-सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को उनके हुनर के अनुरूप अवसर मिल रहा है. साथ में केन्द सरकार द्वारा महिला कल्याण के लिए चलायी जा रही योजनाओं ने महिलाओं को और भी संबल दिया है. इस बार विश्व महिला दिवस पर मध्यप्रदेश एक नया अध्याय लिखने जा रहा है.

केन्द सरकार द्वारा लागू उज्ज्वला योजना, जनधन खाता, मातृत्व वंदना योजना और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे कार्यक्रमों ने करोड़ों बेटियों, बहनों के जीवन को नई दिशा दी है वहीं मध्यप्रदेश में महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।

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महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना सबसे क्रांतिकारी पहलों में से एक रही है। पहली नजर में लगता कहा जाता है कि महिला वोटबैंक को मजबूत करने के लिए रुपये बांटने वाली स्कीम चलायी जा रही है लेकिन जतीनी हकीकत जाँचने जाएं तो पता चलेगा कि इन रुपयो से महिला सशक्तिकरण के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं. करोड़ों रुपये महिलाओं के खातों में पारदर्शी डिजिटल अंतरण के माध्यम से प्रदान किए गए, जिसने मध्यप्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई दिशा दी है।

इस राशि से महिलाओं ने स्व-रोजगार की शुरूआत की है. पहले इस राशि से किराये की सिलाई मशीन ली गई और बाद में अपने मुनाफा से स्वयं की सिलाई मशीन खरीद ली गई. पशु पालन से लेकर किराने की दुकान जैसे अनेक कोशिशों में महिलायें सफल हुई हेैं. इस आत्मनिर्भरता के चलते आहिस्ता-आहिस्ता महिलायें स्वयं में सक्षम होकर योजना से स्वयं ही बाहर होकर शेष जरूरतमंद महिलाओं को अवसर दे रही हैं. सरकार द्वारा जारी आंकड़ें इस बात की पुष्टि करते हैं.

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इसी तरह सात महिलाओं ने अपना समूह तैयार कर एक नए किस्म की कोशिश को अंजाम दिया है. इसे स्व-सहायता समूह कहा गया. स्व-सहायता का सामान्य रूप से अर्थ समझ सकते हैं स्वयं की सहायता करना. स्व-सहायता समूह ने सशक्तिकरण के नए आयाम छुए हैं. कल तो जिन कामों पर पुरुषों का एकाधिकार था, आज उनमें महिलाएं पारंगत हैं. बिजली ठीक करने से लेकर बैंक खाता खुलवाने और उसका परिचालन करने जैसे अनेक कार्य महिलाएं कर रही हैं. मोहन सरकार ने अनेक कार्य स्व-सहायता समूह को सौंप दिया है जो कभी पहले निजी संस्थाएं करती थीं. मोहन सरकार की इस पहल से जैसे पूरा परिदृश्य बदल रहा है.

मध्यान्ह भोजन से लेकर गणवेश बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर स्व-सहायता समूह की महिलाएं कर रही हैं. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान की गई है।


जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में पीएम-जनमन तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्थान अभियान के माध्यम से सैकड़ों नए आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन प्रारंभ किया गया है। इससे जनजातीय महिलाओं और बच्चों को पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ उनके गांवों तक उपलब्ध कराई गई हैं। हजारों भवनों के निर्माण और उन्नयन से आंगनवाड़ी व्यवस्था अधिक सशक्त और सुरक्षित बनी है। पोषण अभियान के अंतर्गत लाखों बच्चों के विकास की निगरानी के लिए अत्याधुनिक उपकरण प्रदान किए गए हैं। फेस-मैच आधारित सत्यापन ने हितग्राहियों को पारदर्शी और समयबद्ध लाभ दिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों ने पोषण और पर्यावरण-दोनों आयामों को जोडक़र जनभागीदारी का नया मॉडल प्रस्तुत किया है।

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मध्यप्रदेश, महिला सम्मान और सुरक्षा के विषय में समाज को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। मिशन शक्ति के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटरों, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पिंक ड्राइविंग लाइसेंस, जेंडर चैंपियन पहल और सशक्त वाहिनी कार्यक्रमों ने महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तीकरण को और मजबूती प्रदान की है। बीते साल मेंं 20,332 महिलाओं को त्वरित राहत और परामर्श उपलब्ध कराया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत नवजात बालिकाओं का स्वागत, पूजा-अर्चना और व्यापक पौधारोपण ने समाज में बेटियों के सम्मान की संस्कृति को मजबूत किया है।

पिंक ड्राइविंग लाइसेंस और जेंडर चैंपियंस जैसी पहलें बालिकाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को नई उड़ान दे रही हैं। राज्य एवं जिला स्तर के हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वुमन ने जनजागरूकता की दृष्टि से अभूतपूर्व कार्य किया है। 100 दिवसीय अभियान, घरेलू हिंसा निरोधक कार्यक्रम, बाल विवाह मुक्ति प्रतिज्ञा, जागरूकता अभियान, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और आत्मरक्षा कार्यक्रमों ने समाज में व्यापक संवेदनशीलता विकसित की है। वर्ष साल में 1.47 लाख से अधिक गतिविधियाँ आयोजित हुईं और लाखों नागरिकों की भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि मध्यप्रदेश, महिला सम्मान और सुरक्षा के विषय में समाज को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

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World Women’s Day – मध्यप्रदेश के लिए यह गौरव की बात है कि यहां से आरंभ की गई योजनाओं को देश के अन्य प्रदेश वैसा ही अपना लेते हैं. मातृशक्ति को लेकर मध्यप्रदेश हमेशा से संवेदनशील रहा है. महिलाओं के आमूलचूल परिवर्तन की साक्षी बनता मध्यप्रदेश को दिशा देने में लोकमाता अहिल्या देवी जैसी शासक, अवंतिबाई, रानी कमलापति जैसी साहसी और सुभदा कुमारी चौहान जैसी विदुषी महिलाओं का मार्गदर्शन हेै. मध्यप्रदेश हमेशा से स्त्री शक्ति का सम्मान करता रहा है और इस विश्व महिला दिवस पर हम सब स्त्री शक्ति का नमन करते हैं, अभिनंदन करते हैं.

लेखक – मनोज कुमार, शोध समागम के सम्पादक है।

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