भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में लंबे समय से लंबित राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा जल्द खुल सकता है। जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ स्टाइल में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में करीब तीन दर्जन नेताओं के नामों की लिस्ट तैयार कर ली गई है, पड़ोसी राज्य में ये नियुक्तियां सालभर पहले ही हो चुकी है, लेकिन एमपी में इस पर मुहर लगने में काफी वक्त लग गया, जिसको अंतिम रुप देकर केंद्रीय नेतृत्व की अनु्मति का इंतजार है, माना जा रहा है कि नवरात्रि में इसकी घोषणा कर दी जाएगी।
प्रस्तावित सूची का खाका
जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित सूची में संगठन और सरकार से जुड़े ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जो लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, साथ ही इसमें उन विधायकों और पूर्व विधायकों को भी मौका मिल सकता है, जोकि पार्टी के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं, इसमें लेकिन अब तक किसी महत्वपूर्ण दायित्व से वंचित रहे हैं। सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास लंबित सूची में किया गया है।
एक बार में जारी होगी पूरी जंबो लिस्ट
पार्टी सूत्रों को अनुसार आने वाले वक्त में जारी होने वाली सूची को एक साथ जारी कर दिया जाएगा, जिस तरह से एक ही बार में छत्तीसगढ़ में सभी निगम-मंडलों और प्राधिकरणों को भर दिया गया था। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इन नियुक्तियों से संगठन में उत्साह बढ़ेगा और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलेगी। साथ ही आने वक्त के नगरीय निकाय चुनाव में नेता पूरे उत्साह के साथ मैदान संभालेंगे।
निगमों में एल्डरमैन की नहीं होगी नियुक्ति
प्रदेश के अधिकतर नगरीय निकायों का कार्यकाल महज कुछ ही महीनों का बचा है, ऐसे में एल्डरमैन की आस को सत्ताधारी दल के नेताओं ने दरकिनार करना शुरु कर दिया है, उन्होंने पार्टी को साफ कह दिया है कि अब इस पद पर नियुक्ति का कोई मतलब नहीं रह जाएगा, क्योंकि इतने कम समय के लिए एल्डरमैन की नियुक्ति करना उचित नहीं होगा, और इस एक तरह से डिमोशन की श्रेणी में माना जाएगा, इसीलिये इस पद को लेकर नेताओं ने दूरी बनाना शुरु कर दिया है।
मंत्रिमंडल विस्तार पर ब्रेक, प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अगले माह
मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें जारी हैं। सूत्रों के अनुसार हाल में इस पर ब्रेक लगा दिया गया है, क्योंकि पार्टी आलाकमान किसी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है, क्योंकि नेताओं की लिस्ट काफी लंबी है, और जिन्हें हटाने की बात हो रही है, वो मुश्किलें ना खड़ी कर दें, क्योंकि पिछले चुनाव में काफी कद्दावरों को प्रदेश में वापस भेज दिया था, जिसके कारण विरोध की स्थिति निर्मित हो सकती है, वहीं, मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अप्रैल में होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हर तीन महीने में नियमित रूप से आयोजित की जा सकती है।


