मध्य प्रदेश में सरकार की देखरेख में संचालित 24 हजार से ज्यादा मंदिरों के पुजारियों को हर महीने मानदेय दिया जाता है. वर्ष 2022 में सरकार ने मानदेय राशि में बदलाव किया था और तब से अब तक करीब 120 करोड़ रुपये पुजारियों को दिए जा चुके हैं. वर्तमान व्यवस्था के अनुसार जिन मंदिरों के पास कृषि भूमि नहीं है, वहां के पुजारियों को पांच हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं. वहीं पांच एकड़ तक जमीन वाले मंदिरों के पुजारियों को 2500 रुपये और पांच से 10 एकड़ तक कृषि भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों को दो हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है.
पुजारी का मानदेय
मंदिरों से जुड़ी कृषि भूमि का उपयोग पुजारी करते हैं, लेकिन जिन मंदिरों के पास 10 एकड़ से ज्यादा जमीन है, उसकी नीलामी का अधिकार जिला प्रशासन के पास होता है. कलेक्टर के माध्यम से नीलामी कराई जाती है और उससे होने वाली आय मंदिर के खाते में जमा की जाती है. नियमों के अनुसार इस राशि का उपयोग मंदिरों के रखरखाव और अन्य जरूरी कार्यों में होना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर ऐसा नहीं हो पा रहा है.
कितना बढ़ा मानदेय
प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2018 में पुजारी महासंघ की मांग पर सरकार ने मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी की थी. उस समय बिना भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों को तीन हजार रुपये, पांच एकड़ तक भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों को 2100 रुपये और पांच से 10 एकड़ तक जमीन वाले मंदिरों के पुजारियों को 1560 रुपये देने का फैसला किया गया था. वहीं 10 एकड़ से अधिक जमीन वाले मंदिरों के पुजारियों को पांच हजार रुपये दिए जाते थे.
जान लें पूरा गणित
बाद में 1 मई 2022 को सरकार ने नियमों में फिर संशोधन किया. इसके तहत बिना भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों का मानदेय बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिया गया. पांच एकड़ तक जमीन वाले मंदिरों के पुजारियों को 2500 रुपये और पांच से 10 एकड़ तक भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों को दो हजार रुपये देने का प्रावधान तय किया गया. हालांकि 10 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों का मानदेय पूरी तरह समाप्त कर दिया गया. तब से यही व्यवस्था लागू है.
व्यवस्था में बदलाव करने की मांग
पुजारियों से जुड़े संगठन अब इस व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि 10 एकड़ से अधिक भूमि की नीलामी का अधिकार फिर से पुजारियों को दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह भूमि मंदिरों को दान स्वरूप मिली थी. पुजारी उत्थान समिति के विधिक सलाहकार हेमंत वैष्णव का कहना है कि जिस तरह किसानों और अन्य कृषि उपयोगकर्ताओं को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है, उसी तरह मंदिरों की जमीन का उपयोग करने वाले पुजारियों को भी योजनाओं का फायदा मिलना चाहिए. इस मामले को लेकर जल्द अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी भी चल रही है. वहीं प्रांतीय पुजारी महासभा ने भी सरकार से मानदेय बढ़ाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि कई पुजारी अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं, इसलिए उनका सर्वे कर सूची में शामिल किया जाना चाहिए. साथ ही मंदिरों की जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराकर मंदिरों को सौंपने और उनके नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है.
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