भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने वाली है। 19 जून को बीजेपी के डॉ.सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह कार्यकाल खत्म हो जाएगा। दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार राज्यसभा जाने से पार्टी को इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा था कि मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं। दिग्विजय के इनकार के बाद कांग्रेस के कब्जे वाली राज्यसभा सीट के लिए छोटे- बडे़ नेताओं को मिलाकर करीब दर्जन भर नेता दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन इसी बीच कांग्रेस को डर सता रहा है कि महज 6 विधायक इधर से उधर हुए तो यह एक सीट भी उसके हाथ से जा सकती है।
कांग्रेस को सता रहा डर
दिग्विजय सिंह के सीट खाली करने के बाद इसके जरिए राज्यसभा जाने की रेस में पूर्व सीएम कमलनाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, पूर्व मंत्री कमलेश्वरल पटेल, सज्जन सिंह वर्मा और कांग्रेस एससी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार का नाम सामने आ रहा है। इन्हीं में शामिल एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि बीजेपी इस सीट को कब्जा जमाने के लिए उसके 6 विधायकों से संपर्क कर सकती है, उनको आगामी चुनाव में टिकट से लेकर अन्य प्रलोभन देकर भाजपा अपनी तरफ कर सकती है।
कांग्रेस ने अभी से की तैयारी शुरु
कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार पार्टी ने अभी से अपने विधायकों को मजबूत करना शुरु कर दिया है, उनसे व्यक्तिगत बातचीत कर आगामी राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के लिए संकल्प दिलाया जा रहा है, ताकि मौके पर किसी भी तरह की टूट की स्थिति ना बनें। कहा जा रहा है कि इसका जिम्मा भी पार्टी दिग्विजय सिंह जैसे सीनियर लीडर को दे सकती है, ताकि रणनीति को बखूबी ढंग से अंजाम दिया जा सके।
बीजेपी ने शुरु की गुप्त तैयारी
बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने तीसरी सीट पर प्रत्याशी उतारने का अभी पूरी तरह से कोई मन नहीं बनाया है, लेकिन कहा जा रहा है कि संभावना बनने की स्थिति में पार्टी किसी भी निर्णय को लेने के लिए तैयार रहेगी, क्योंकि सत्ताधारी दल के साथ पहले ही कई कांग्रेस के विधायक आ चुके हैं, ठीक वैसी ही स्थिति आने वाले वक्त में भी देखने को मिल सकती है।
एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों की जरुरत
एमपी की तीन राज्यसभा सीटों को लेकर 230 विधायकों के समीकरण पर चुनाव होगा। एक प्रत्याशी को जीत के लिए 58 विधायकों के मत की आवश्यकता होगी, जबकि कांग्रेस के पास वर्तमान में 65 विधायक हैं, इनमें से बीना विधायक निर्मला सप्रे अब बीजेपी के साथ हैं। ऐसे में कांग्रेस के पास 64 विधायक बचते हैं, इसी तरह विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शून्य कर दिया है। यदि मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती है। तो एक और वोट कम हो जाएगा। इस स्थिति में कांग्रेस के पास 63 विधायक बचेंगे।
निर्मला सप्रे और कमलेश्वर डोडियार का वोट महत्वपूर्ण
अंदरुनी सियासी जानकारों के मानना है कि बीजेपी 5 विधायकों को इधर से उधर करने की स्थिति में काफी मजबूत है, ऐसे में बीएपी के एक मात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार का मत भी महत्वपूर्ण होगा। साथ ही बीना विधायक निर्मला सप्रे के वोट की भी अहमियत सामने आ जाएगी। वहीं, विधानसभा में बीजेपी के आंकड़ों के हिसाब से 164 विधायक हैं। बीना विधायक के समर्थन से विधायकों की संख्या 165 हो सकती है।
दिग्विजय सिंह को मिले थे 57 वोट
पिछले राज्यसभा चुनाव में स्थिति कुछ और थी, क्योंकि उस वक्त ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी में गए 22 विधायकों और दो विधायकों के निधन के कारण कुल 24 सीटें खाली थीं। 206 सीटों के गणित पर हुए राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 52 वोटों की जरूरत थी। दिग्विजय सिंह 57 वोट पाकर राज्यसभा सांसद चुने गए थे, लेकिन अबकी बार पूरी 230 सीटें भरी हुई है, लिहाजा जीत का आंकड़ा 58 रहेगा।


