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25 साल की सेवा के बाद TET की अनिवार्यता पर शिक्षकों का भड़का आक्रोश, रिव्यू पिटीशन की मांग

MP Teacher TET Compulsory News

भोपाल: मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अनुभवी शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के आदेश ने मध्यप्रदेश के शिक्षक समुदाय में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने इस आदेश को अनुचित बताते हुए राज्य सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में अति शीघ्र ‘पुनर्विचार याचिका’ (Review Petition) दायर करने की गुहार लगाई है।

20-25 साल की सेवा के बाद परीक्षा का औचित्य क्या?

शिक्षक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सतीश शर्मा और प्रवक्ता अनीता सारस्वत ने कहा कि विभाग ने माननीय उच्चतम न्यायालय का हवाला देकर परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। यह उन शिक्षकों के लिए अपमानजनक स्थिति है जो पिछले 20 से 25 वर्षों से विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षकों का तर्क है कि उनकी नियुक्ति के समय राज्य शासन द्वारा निर्धारित सभी सेवा भर्ती नियमों और शर्तों की प्रतिपूर्ति की गई थी।

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अनिवार्य योग्यता और प्रशिक्षण पर उठाए सवाल

शिक्षक कांग्रेस संगठन ने कहा कि समस्त कार्यरत शिक्षक पहले से ही D.Ed. और B.Ed. प्रशिक्षित हैं, जो शिक्षक चयन हेतु अनिवार्य योग्यता है। यह डिग्रियां मान्यता प्राप्त बोर्ड और विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान की गई हैं। राज्य शासन द्वारा समय-समय पर इन शिक्षकों को विषय-वार आवासीय और गैर-आवासीय प्रशिक्षण भी दिए गए हैं।
ऐसे में दशकों बाद नई पात्रता परीक्षा थोपना शिक्षकों के अनुभव और उनकी योग्यता को नजरअंदाज करना है।

मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की अपील

शिक्षक कांग्रेस ने मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव और आयुक्त लोक शिक्षण को पत्र लिखकर मांग की है कि विभाग द्वारा पैदा की गई असमंजस की स्थिति को समाप्त किया जाए। संगठन का कहना है कि शिक्षकों के हित में सरकार को तुरंत सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करनी चाहिए।

इन पदाधिकारियों ने बुलंद की आवाज

मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस के अशोक प्रताप सिंह, धर्मेंद्र सिंह, हरीश नामदेव, आरपी सिंह, महेंद्र दीक्षित, सुनील मिश्रा, रामहित, कौशल शर्मा, राम रतन सिंह, नरेंद्र सिंह, सुरेश रावत, तुलसी रावत, निर्भय सिंह, अमित सिंह, बलवीर सिंह, नलिनी शाक्य, राकेश बलिया, सलमा शाह, संतोष मिश्रा, अभिमन्यु पांडे, जय नारायण गुप्ता, मोहन चंद्र गौतम, विजय सिंह, अरुण कुशवाहा, हेमराज राणा, प्रमोद गौतम, डॉ. विद्या बिसेन, दौलत पवार, कमल सिंह, बालू सिंह, कैलाश उईके, संजय मछीवाल, मिथिलेश, कल्पना श्रीवास्तव, मंजू गजभिए, साधना सिंह, मनोज मेहर, राजेश नामदेव, जगन नरवरिया, मोहम्मद ताज, राजेश पांडे, संतोष राजपूत, मोहम्मद अनवर और जरीना सहित अन्य पदाधिकारी ने अति शीघ्र राज्य शासन द्वारा शिक्षक हित में रिव्यू पिटीशन दायर करने की मांग की।

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