डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ mukhyamantri kanya vivah yojana dindori: डिंडौरी, अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त पर डिंडौरी जिले का बजाग क्षेत्र एक ऐतिहासिक सामाजिक समागम का गवाह बना। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन में बजाग और करंजिया जनपद के 200 जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नए जीवन की शुरुआत की। शासन की इस पहल से न केवल गरीब परिवारों को संबल मिला, बल्कि सामाजिक समरसता की एक नई इबारत भी लिखी गई।

परंपराओं का सम्मान: मंत्रोच्चार और आदिवासी रीति-रिवाज
समारोह की शुरुआत बेहद उत्साहजनक रही। जनपद कार्यालय से गाजे-बाजे के साथ भव्य बारात निकाली गई, जो बीआरसी मैदान स्थित आयोजन स्थल तक पहुंची। सांस्कृतिक विविधता: विवाह पंडाल में जहां एक ओर पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ फेरे करवाए, वहीं दूसरी ओर कई जोड़ों ने अपनी समृद्ध आदिवासी परंपराओं के अनुसार वैवाहिक रस्में पूरी कीं।

राजकीय उपहार: सरकार की ओर से प्रत्येक जोड़े को 49 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया गया। साथ ही दूल्हों को कुर्ता-पायजामा और दुल्हनों को सुंदर ड्रेस व चुनरी उपहार स्वरूप दी गई।
कलेक्टर और विधायक की अनूठी ‘नसीहत’
इस आयोजन की सबसे खास बात जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा नवदंपत्तियों को दी गई व्यावहारिक सलाह रही: डिजिटल युग में रिश्तों की मर्यादा: कांग्रेस विधायक ओमकार मरकाम ने युवाओं को सचेत करते हुए कहा कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग घरों में विवाद का कारण बन रहा है, इसे रिश्तों के बीच न आने दें। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और सुरक्षित ड्राइविंग की भी अपील की।
शिक्षा और पर्यावरण का संकल्प: जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने दूल्हों से विशेष वचन लिया कि वे अपनी पत्नियों की पढ़ाई बीच में नहीं रुकवाएंगे। उन्होंने बुजुर्गों के सम्मान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए घर में तुलसी का पौधा लगाने और ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ (बारिश का पानी सहेजने) का संकल्प भी दिलाया।

शादी के मंडप में ‘डिजिटल प्रशासन’
प्रशासनिक चुस्ती का आलम यह था कि शादी की रस्मों के बीच ही सरकारी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। एसडीएम राम बाबू देवांगन के नेतृत्व में कार्यक्रम स्थल पर ही प्रगणकों की टीम तैनात थी। ”समारोह स्थल पर लगभग दो दर्जन प्रगणक तैनात किए गए थे, जिन्होंने मौके पर ही नवविवाहित जोड़ों के ऑनलाइन स्व-गणना पत्रक भरे। आयोजन के दौरान ही 40 से अधिक जोड़ों का डेटा ऑनलाइन दर्ज कर लिया गया।” — एसडीएम, बजाग
बजाग का यह सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि एक प्रगतिशील समाज की झलक था। जहां एक ओर आर्थिक मदद ने परिवारों का बोझ कम किया, वहीं शिक्षा, नशामुक्ति और पर्यावरण जैसे विषयों पर दी गई सीख ने इन 200 जोड़ों के भविष्य को एक नई दिशा प्रदान की।
