भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारी काफी दिन से आंदोलन की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन उन्हें बार-बार प्रदर्शन के लिए इंकार कर दिया जा रहा था। वहीं प्रदर्शन की अनुमति मिल गई, तो आउटसोर्स कर्मचारियों का राजधानी भोपाल में बड़ा जमावड़ा लगा। इस आंदोलन को ‘महाक्रांति आंदोलन’नाम दिया गया है, जिसके जरिए कर्मचारियों ने अपनी मांग सरकार के सामने रखी। कर्मचारियों को प्रदर्शन की अनुमति 2 साल के बाद मिली है, इससे समझ सकते हैं कि कब से ये कर्मचारी अपनी मांगे उठाने के लिए गुहार लगा रहे थे।
आउटसोर्स कर्मचारियों का हल्लाबोल
भोपाल के तुलसी नगर में स्थित अंबेडकर पार्क में सुबह 10 बजे से “महाक्रांति आंदोलन” के जरिए आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद की। प्रदेश के बैंक मित्र, पंचायत चौकीदार, पंप आपरेटर, अंशकालीन भृत्य, स्वच्छाग्राही, राजस्व सर्वेयर, आउटसोर्स एवं अस्थायी कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों ने इसमें हिस्सा लिया। संयुक्त बैनर आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा भी इसमें शामिल था।
ये प्रमुख मांगें
समान वेतन नीति को तत्काल लागू किया जाए। ग्राम पंचायत चतुर्थ श्रेणी, अस्थाई कर्मचारी, स्कूल छात्रावासों, शासकीय कार्यालय में अंशकालीन एवं आउटसोर्स कर्मचारी को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर नियमित किया जाए। नियमित नौकरी और न्यूनतम 21 हजार वेतन देने, नौकरियों में लागू ठेका प्रथा, कंपनी राज और अस्थायी व्यवस्था पूरी तरह खत्म करने की मांग उठाई गई।


