सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी— शहर में आयोजित होने जा रहे हज़रत इशाह दाता चिश्ती र.अ. के पीर बाबा उर्स मेले को लेकर जहां आयोजक कौमी एकता और भाईचारे का संदेश देने का दावा कर रहे हैं, वहीं आयोजन को लेकर कई सवाल भी खड़े होने लगे हैं। 10 और 11 मई को होने वाले कव्वाली कार्यक्रमों में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अब तक सुरक्षा, ट्रैफिक और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन की तैयारी स्पष्ट नहीं दिख रही।उर्स आयोजन समिति का कहना है कि यह आयोजन शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सौहार्द की पहचान है, जहां हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सभी समाजों के लोग शामिल होकर मोहब्बत और इंसानियत का संदेश देते हैं। लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल ऐसे आयोजनों के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और आम लोगों को घंटों जाम और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है।सूत्रों के मुताबिक, देर रात तक चलने वाले कव्वाली कार्यक्रमों के कारण आसपास के क्षेत्रों में शोर-शराबे और भीड़भाड़ की स्थिति भी बन सकती है। वहीं बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले जायरीनों को लेकर पार्किंग, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।हालांकि समिति के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता में आयोजन को कटनी की सांस्कृतिक विरासत बताते हुए लोगों से शामिल होने की अपील की। इस दौरान सैयद फहीम अशरफ, कमेटी अध्यक्ष तनवीर खान (तन्नू), अज्जू भाईजान, अनवर भाईजान, तौफीक भाईजान, सोनू भाईजान, काजी वसीम खान, हैप्पी भाईजान, मोनू भाईजान और हाजी हबीब सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।अब सवाल यह है कि क्या यह आयोजन वास्तव में कौमी एकता और भाईचारे की मिसाल बनेगा, या फिर अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही के चलते लोगों की परेशानियों का कारण बनेगा।
कव्वाली की महफिल सजेगी, लेकिन व्यवस्था पर मंडरा रहे सवाल
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