शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ डिंडोरी/ मध्य प्रदेश की महान वीरांगना रानी अवंती बाई के बलिदान दिवस पर डिंडोरी जिले के बालपुर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए रानी के अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति उनके समर्पण को नमन किया।
संग्रहालय का लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने रानी अवंती बाई की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए बालपुर में 1 करोड़ की लागत से नवनिर्मित संग्रहालय का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को रानी के पराक्रम और बलिदान की याद दिलाता रहेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिवनी के मनखेड़ी में जन्मी रानी की तलवार जब चलती थी, तो अंग्रेजों के हौसले पस्त हो जाते थे। जब अंग्रेजों ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को तोप से उड़ाया, तब रानी ने ही क्रांति की कमान संभाली थी। सागर में उनके नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना भी इसी दिशा में एक बड़ी श्रद्धांजलि है।
डिंडोरी ने रचा इतिहास
मुख्यमंत्री ने डिंडोरी जिला प्रशासन की प्रशंसा करते हुए बताया कि एनीमिया मुक्त भारत संकल्प के तहत एक ही दिन में 50,000 से अधिक महिलाओं और बेटियों की स्वास्थ्य जांच की गई। इस शानदार उपलब्धि के कारण डिंडोरी का नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। साथ ही, 14-15 वर्ष की बेटियों के HPV टीकाकरण में भी जिला प्रदेश में प्रथम रहा।
जनप्रतिनिधियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
समारोह के मुख्य अतिथि सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का स्वागत स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक गैंडी नृत्य से किया। कुलस्ते ने कहा कि रानी का बलिदान स्वर्ण अक्षरों में अंकित है और समाज में एकता व राष्ट्रभक्ति को मजबूत करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने रानी के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए बालपुर के इस स्थान का उपयोग सामाजिक कार्यों के लिए करने का आह्वान किया और अपने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
प्रशासनिक और स्थानीय नेतृत्व की उपस्थिति
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने रानी के जीवन को देशभक्ति की अनुपम मिसाल बताया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष रूद्रेश परस्ते, भाजपा जिलाध्यक्ष चमरू सिंह नेताम, एसपी वाहिनी सिंह, जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी सहित बड़ी संख्या में जन प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन रानी अवंती बाई के प्रति कृतज्ञता और गौरव का प्रतीक बन गया।


