अरविंद तिवारी/ खबर डिजिटल/ रीवा/ मध्य प्रदेश के रीवा जिले के त्यौंथर तहसील से एक मामला सामने आया है। यहां एक बेवा महिला का घर सिर्फ इसलिए मलबे में तब्दील कर दिया गया क्योंकि उसने एसडीएम के चालक की कथित रिश्वत की मांग पूरी नहीं की। प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है।
रिश्वत नहीं दी तो चला दिया बुलडोजर
पीड़ित महिला का आरोप है कि त्यौंथर एसडीएम के चालक रामजी मिश्रा ने उससे 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। जब महिला ने असमर्थता जताई, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आरोप है कि जब महिला और उसका परिवार घर पर मौजूद नहीं थे, तभी प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उसके घर को शासकीय भूमि पर अतिक्रमण बताकर ध्वस्त कर दिया।
चालक की भूमिका पर उठते गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि आरोपी चालक रामजी मिश्रा उसी ग्राम पंचायत चुनरी का निवासी है, जहां यह कार्रवाई हुई। पीड़िता का कहना है कि चालक देर रात तक उसके घर आकर दबाव बनाता था। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह निजी रंजिश और प्रभाव का दुरुपयोग है। बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए किसी का घर गिराना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गहरा दाग लगाता है।

न्याय के लिए भटक रही बेवा
अपना सिर छुपाने की छत खो चुकी महिला अब न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है। उसकी सुनने वाला कोई नहीं है और प्रशासनिक गलियारों में चुप्पी पसरी हुई है। हैरानी की बात है कि इतने गंभीर आरोपों के बाद भी कोई अधिकारी कैमरे के सामने बोलने को तैयार नहीं है।
यह मामला न केवल भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे रसूखदार लोग सरकारी तंत्र का इस्तेमाल गरीबों को कुचलने के लिए कर रहे हैं। अब देखना होगा कि शासन इस चालक राज पर लगाम कसता है या पीड़ित महिला की गुहार अनसुनी कर दी जाएगी।


