रीवा/ अरविन्द तिवारी/ खबर डिजिटल/ ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 02 में कार्यरत प्रभारी कार्यपालन यंत्री एसबी रावत पर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित हो गए हैं। अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि रावत ने सेवा पुस्तिका में कूटरचना (forgery) कर अपने सरनेम में परिवर्तन किया और बिना सक्षम शासन की अनुमति के डुप्लीकेट सेवा पुस्तिका तैयार कराई।
सेवा पुस्तिका में खुद की प्रविष्टियां
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि रावत ने सेवा सत्यापन, वेतन निर्धारण, वार्षिक वेतनवृद्धि जैसी प्रविष्टियां स्वयं अपने हस्ताक्षर से कीं। यह कृत्य शासन के नियमों के पूर्णतः विपरीत बताया गया है। साथ ही अचल संपत्ति विवरण छिपाने का मामला भी उजागर हुआ है, रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 तक ईई रावत ने अपनी चल-अचल संपत्ति का वार्षिक विवरण प्रस्तुत नहीं किया, जो कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 की धारा 19 का स्पष्ट उल्लंघन है। अधीक्षण यंत्री की जांच में यह भी सामने आया कि रावत ने रीवा बोदा बाग और सिरमौर के डोल ग्राम में निवास करते हुए, अपनी सेवा पुस्तिका में मैहर जिला निवासी होना दर्शाया, ताकि शासन के पदस्थापना नियमों से बचा जा सके।
गलत जानकारी देकर नियमों का उल्लंघन का मामला
शासन नियमों के अनुसार, किसी भी जिला स्तरीय अधिकारी की पदस्थापना उसके पैत्रिक जिले में नहीं की जा सकती। इसके बावजूद एसबी रावत ने गलत जानकारी देकर रीवा में पदस्थापना प्राप्त की, जोकि रीवा संभाग क्रमांक 02 में कार्यरत रहे। जानकारी के अनुसार, रावत के रीवा बोदा बाग में पत्नी श्यामा कोल के नाम आलीशान आवास हैं, जिसकी जानकारी उन्होंने सेवा अभिलेखों में छुपाई।
RTI से हुआ मामले का खुलासा
सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने आरटीआई के जरिए मामला उजागर किया। जिसमें पता चला कि EE एसबी रावत ने अपनी अचल संपत्ति का विवरण न तो कार्यालय में जमा किया और न ही पोर्टल पर अपलोड कराया।
EE एसबी रावत पर हो सकती है कार्रवाई
गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने के बाद EE एसबी रावत पर शासन स्तर पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसको लेकर कहा जा रहा है कि इसकी तैयारियां शुरु हो चुकी है।
सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने आरटीआई के जरिए मामला उजागर किया। जिसमें पता चला कि EE एसबी रावत ने अपनी अचल संपत्ति का विवरण न तो कार्यालय में जमा किया और न ही पोर्टल पर अपलोड कराया।


