सीधी/बृजेश पाण्डेय/खबर डिजिटल/ पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे कथित अत्याचार, हिंसा और अमानवीय घटनाओं के विरोध में सोमवार को सीधी जिले में व्यापक आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर भारत के महामहिम राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर, जिला सीधी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा और इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की।
हिंदू समुदाय को बना रहे निशाना
ज्ञापन में बताया गया कि 05 अगस्त 2025 को बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद से वहां रह रहे हिंदू समुदाय को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। आरोप लगाया गया कि कट्टरपंथी तत्वों द्वारा हिंदुओं के घरों, दुकानों, मंदिरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर हमले किए जा रहे हैं। हिंसा, लूटपाट, आगजनी, हत्या और महिलाओं के साथ अत्याचार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे अल्पसंख्यक समाज भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर है।
मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन
ज्ञापन के अनुसार अगस्त 2025 से अब तक लाखों हिंदुओं को प्रताड़ना झेलनी पड़ी है, वहीं हजारों परिवार अपने घर-बार, जमीन और रोजगार छोड़कर पलायन करने को मजबूर हुए हैं। आर्थिक बहिष्कार और सामाजिक उत्पीड़न के चलते हिंदू समुदाय का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बहन-बेटियों के साथ हो रहे अत्याचारों को मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया गया।
दोषियों को तत्काल सख्त सजा देने की मांग
ज्ञापन में 19 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश के ममन सिंह जिले में हुई एक बेहद दर्दनाक घटना का विशेष उल्लेख किया गया। बताया गया कि दीपचंद्र दास नामक एक श्रमिक को कट्टरपंथी तत्वों द्वारा बेरहमी से पीटा गया और बाद में पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिया गया। इस घटना को मानवता को शर्मसार करने वाला बताते हुए दोषियों को तत्काल सख्त सजा देने की मांग की गई।
भारत सरकार से की अपील
सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भारत सरकार से अपील की कि वह इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाए। साथ ही पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराने और बांग्लादेश सरकार पर प्रभावी दबाव बनाने की मांग की गई।
इन्होंने की सरकार से मांग
इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में पुष्पराज मिश्रा, पुजारी लाल मिश्रा, विकास नारायण तिवारी, सुधांशु तिवारी कटारे, मृत्युंजय मिश्रा, मार्तंड मिश्रा, सनत तिवारी, अतुल शर्मा, प्रद्युम्न मिश्रा, अतुल शुक्ला, सत्यानंद मिश्रा, अमित पांडेय, टिंकू द्विवेदी, मंगलदीन साकेत, प्रशांत मिश्रा, अविनाश मिश्रा, दादू पांडेय, प्रवीण मिश्रा सहित आधा सैकड़ा कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे।


