झाबुआ/नावेद रजा/खबर डिजिटल/शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते चार महीनों में 562 लोग कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंच चुके हैं। स्थिति यह है कि अब ये कुत्ते सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, बल्कि कलेक्ट्रेट से लेकर जिला अस्पताल परिसर तक बेखौफ घूमते नज़र आ रहे हैं।

कलेक्ट्रेट में इनके प्रवेश को रोकने के लिए गलियारों में रंगीन पानी से भरी बोतलें रखी गई थीं, लेकिन यह उपाय भी कोई असर नहीं दिखा सका। कर्मचारियों को रोजाना इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दिन पहले एक महिला कर्मचारी को भी कुत्ते ने काट लिया था। शहर की गलियों में घूमते कुत्तों के झुंड स्कूल जाने वाले बच्चों और राहगीरों के लिए भी बड़ा खतरा बने हुए हैं।
नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही के चलते हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। सीएमओ मिलन पटेल के सरकारी आवास के बाहर भी आवारा कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं।
नगर पालिका ने इन कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण के लिए दो बार टेंडर जारी किए, लेकिन कोई भी एनजीओ इसमें आगे नहीं आया। सीएमओ के अनुसार, नियमों के कारण सीधे कार्रवाई संभव नहीं है। उन्होंने जल्द तीसरी बार टेंडर जारी करने की बात कही।
जिला अस्पताल के रिकॉर्ड बताते हैं कि जुलाई में 148, अगस्त में 120, सितंबर में 161 और अक्टूबर में 133 से अधिक लोगों का इलाज किया गया। केवल 29 अक्टूबर को ही 18 लोग कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे थे। सिविल सर्जन डॉ. एमएल मालवीय के अनुसार, प्रतिदिन 8 से 10 मरीज डॉग बाइट के उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन गंभीर मरीजों के लिए आवश्यक रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) का स्टॉक फिलहाल नहीं है।
हाल ही में करवड़ में भी एक पागल कुत्ते ने 5 लोगों पर हमला कर दिया था। बीएमओ डॉ. एमएल चोपड़ा ने बताया कि वैक्सीन की कोई कमी नहीं है और सभी घायलों का उपचार किया गया है।


