बड़वारा – यहाँ बच्चों को स्कूल भेजना अब रोमांचक खेल बन गया है जीवित पहुंच जाएं तो किस्मत वाले!
ऑटो में बच्चों को ऐसे ठूंस दिया जाता है मानो सब्ज़ी की बोरी भरी जा रही हो। और वे झूलते हुए घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुँच भी जाते हैं। ऊपर से यह इलाका माइनिंग ज़ोन, यानी जहाँ हर मोड़ पर मौत की “संभावना” मौजूद रहती है।
RTO विभाग को चिंता है,लेकिन हाईवे पर उगाही की टेंशन ज़्यादा बड़ी है! ऑटो वालों को पकड़ने से बेहतर है, दो-चार ट्रक रोककर वसूली का टारगेट पूरा कर लिया जाए।
थाना पुलिस भी बड़ी “समझदार” है जब तक हादसा नहीं होता, तब तक शांति बनाए रखना ही असली कानून व्यवस्था है।
और अगर कभी हादसा हो भी गया, तो चिंता की बात नहीं — जांच समिति बन जाएगी, प्रेस नोट जारी हो जाएगा, दो दिन बाद मामला ठंडा पड़ जाएगा।
बच्चे रोज़ ऑटो में झूलते हैं, अभिभावक रोज़ डरते हैं, और सिस्टम रोज़ मुस्कराता है — आखिर “व्यवस्था” नाम की चीज़ है किसलिए?


