टीकमगढ़/सुबोध पाठक/खबर डिजिटल/ कोरोना काल जब पूरी दुनिया अवसरों के सिमटने की बात कर रही थी, उसी दौर में टीकमगढ़ निवासी प्रदेश के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार रामस्वरूप दीक्षित ने आपदा को अवसर में बदलते हुए एक नई साहित्यिक पहल की शुरुआत की। ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साहित्यिक संगोष्ठियों का सिलसिला शुरू हुआ और यहीं से एक ऐसे मंच की कल्पना जन्मी, जिसने आज पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। इसी सोच से “समकालीन व्यंग्य समूह” की स्थापना हुई। बीते 5 वर्षों में यह समूह देश का सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक समूह बनकर उभरा है। समूह से आज देश के शीर्ष व्यंग्यकार, कवि, कहानीकार, उपन्यासकार, आलोचक, संपादक सहित विभिन्न विधाओं के प्रतिष्ठित साहित्यकार जुड़े हुए हैं।
नियमित साहित्यिक सत्रों से बनी अलग पहचान
समूह के संस्थापक एवं मुख्य एडमिन रामस्वरूप दीक्षित ने बताया कि प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात्रि 10 बजे तक एक साहित्यिक सत्र आयोजित किया जाता है। सप्ताह के अलग-अलग दिन अलग विधाओं के लिए निर्धारित हैं। दोपहर में समूह के किसी सदस्य की चयनित रचना पटल पर साझा की जाती है, जिस पर रात तक गहन चर्चा, समीक्षा और विमर्श होता है।
इसके अलावा एक दिन समसामयिक विषयों पर वैचारिक चर्चा के लिए तय किया गया है। हर रविवार को ऑनलाइन साहित्यिक आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश के रचनाकार सहभागिता करते हैं।
5 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य ऑनलाइन समारोह
समूह के 5 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सह-एडमिन आरती शर्मा के संयोजन और युवा कवयित्री दिव्या अरोड़ा के संचालन में भव्य ऑनलाइन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े अनेक लेखकों और कवियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में विभिन्न सत्रों के संचालकों रामकिशोर उपाध्याय (प्रधान संपादक, अट्टहास), रणविजय राव, टीकाराम साहू आज़ाद और विनीता राहुरीकर ने अपने-अपने सत्रों की जानकारी साझा की।
देश-विदेश के साहित्यकारों ने की सराहना
समारोह में अमेरिका से डॉ. हरीश नवल, कनाडा से धर्मपाल महेंद्र जैन, दुबई से नितिन उपाध्ये सहित सुभाष चंदर, बुलाकी शर्मा, पिलकेंद्र अरोड़ा, संतराम पांडेय, विनीता गुप्ता, डॉ. कुसुम डोगरा, आशुतोष कुमार, रश्मि लहर, भंवरलाल जाट, केदार शर्मा और अंकित शर्मा ने समूह की रचनात्मक यात्रा पर अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने कही दिल की बात
वक्ताओं ने कहा कि व्यंग्य समूह होने के बावजूद इसमें कविता, कहानी, आलोचना सहित सभी साहित्यिक विधाओं को समान स्थान दिया गया है, जिससे यह समकालीन साहित्य का सशक्त प्रतिनिधि बन गया है। समूह में होने वाली गंभीर साहित्यिक चर्चाएं और हर बुधवार होने वाला वैचारिक विमर्श इसकी विशिष्ट पहचान हैं।
अंतरराष्ट्रीय पहचान
देश के साथ-साथ विदेशों से साहित्यकारों को जोड़कर रामस्वरूप दीक्षित ने इस समूह को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है। समूह ने नियमित सत्रों के अलावा सैकड़ों ऑनलाइन साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित कर एक मिसाल कायम की है। वरिष्ठ व्यंग्यकार आदरणीया सूर्यबाला जी ने अस्वस्थता के कारण कार्यक्रम में शामिल न हो पाने पर ऑडियो संदेश के माध्यम से समूह को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
आभार और भविष्य की प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के अंत में समूह के संस्थापक एवं मुख्य एडमिन रामस्वरूप दीक्षित ने सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समकालीन व्यंग्य समूह को और अधिक सशक्त, रचनात्मक एवं अनुशासित मंच बनाने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। समकालीन व्यंग्य समूह आज सोशल मीडिया के सार्थक और सकारात्मक साहित्यिक उपयोग का श्रेष्ठ उदाहरण बनकर उभरा है।


