बैतूल/ सचिन जैन/ खबर डिजिटल/ जिले के आदिवासी समाज से जुड़े 39 मजदूरों ने कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सारनी मछलीकाटा निवासी ठेकेदार विशाल सरकार और सूरज मालाकार ने बेहतर मजदूरी का झांसा देकर पहले नागपुर और फिर ओडिशा के अमोल क्षेत्र में निर्माणाधीन पावर प्लांट में काम पर लगाया। मजदूरों के अनुसार उनसे 17 से 18 दिन तक लगातार काम कराया गया, लेकिन मेहनताना आज तक नहीं दिया गया।
बंगाली समाज प्रकोष्ठ के समन्वयक मिथुन विश्वास के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे मजदूरों ने बताया कि सितंबर 2025 में ठेकेदारों ने प्रतिदिन 1000 रुपये मजदूरी के साथ रहने और खाने की व्यवस्था का आश्वासन दिया था। भरोसा कर सभी मजदूर उनके साथ चले गए, जहां उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराया गया। आरोप है कि काम के दौरान उन्हें बाहर जाने की स्वतंत्रता भी नहीं दी गई।
काम पूरा होने के बाद जब मजदूरी मांगी गई तो ठेकेदारों ने बिल पास न होने का बहाना बनाकर भुगतान टाल दिया। कभी दिवाली तक पैसे देने की बात कही गई, लेकिन हाल ही में मजदूरी मांगने पर साफ इनकार कर दिया गया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें जातिगत गालियां देकर अपमानित भी किया गया।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार सभी मजदूर आदिवासी समाज से हैं और दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। 17-18 दिनों की कुल मजदूरी लगभग 11 लाख रुपये बनती है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि बकाया राशि दिलाई जाए तथा बंधुआ मजदूरी, बलात श्रम और जातिगत अपमान के तहत संबंधित ठेकेदारों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पीड़ित मजदूर चिचडोल, बंजारीढाल, आमढाना और धारणमहू क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की मांग की गई है।


