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Friday, April 17, 2026
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आदिवासी ज़मीन घोटाले के विरोध में आदिवासी संगठनों ने किया कलेक्ट्रेट कार्यालय घेराव

खबर डिजिटल,/कटनी/न्यूज़ – प्रदेश के बहुचर्चित आदिवासी ज़मीन घोटाले के विरोध में विभिन्न आदिवासी संगठन बुधवार को एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि विधायक संजय पाठक ने अपने चार आदिवासी कर्मचारियों को मोहरा बनाकर कटनी, जबलपुर, उमरिया, सिवनी और डिंडोरी जिलों में बेनामी संपत्तियाँ खरीदी हैं, जिससे आदिवासी समुदाय के अधिकारों का गंभीर हनन हुआ है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मामले की शिकायत पाँच माह पहले जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को सौंपी गई थी, लेकिन आज तक किसी भी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली तक पहुंच चुकी है और आयोग पाँच जिलों के कलेक्टरों को नोटिस भी जारी कर चुका है।प्रदर्शन के दौरान प्रतिनिधियों ने मांग की कि चारों आदिवासी कर्मचारियों—नत्थू कोल, प्रहलाद कोल, राकेश सिंह गोंड और रघुराज सिंह गोंड—के पिछले 25 वर्षों के बैंक खातों की विस्तृत जांच कराई जाए, क्योंकि इन्हीं खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन होने का आरोप है।शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने कहा कि चार माह पहले दिए गए आवेदन पर पुलिस ने केवल उनका बयान दर्ज किया, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आरोप है कि जिला प्रशासन ने आज तक संबंधित आदिवासियों के बैंक खातों की जानकारी भी एकत्र नहीं की है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों द्वारा संचालित फर्मों ने गरीब आदिवासी कर्मचारियों के खातों में भारी भरकम राशि डालकर बेनामी संपत्ति का खेल खेला है।प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस अधीक्षक द्वारा नियुक्त जांच अधिकारी दबाव में आकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल चुके हैं।आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संजय पाठक पर FIR दर्ज नहीं की गई और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वे अदालत का रुख करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में समस्त ज़िम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।कलेक्ट्रेट परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन में जयस, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन सहित अनेक संगठनों के पदाधिकारियों और सैकड़ों आदिवासी शामिल रहे। प्रमुख रूप से मौजूद रहे—मनोज धुर्वे, रामनारायण कुररिया, मोहम्मद इसराइल, ओंकार सिंह, कमल पांडेय, शुभम मिश्रा, अजय खटिक, शशांक गुप्ता, अजय गोंटिया, विनोद मरावी, पूरण सिंह, दरयाब सिंह, सत्येंद्र परते, अजय सिंह गौड़, राघवेंद्र सिंह, छात्रपाल मरावी, सागर मरावी, शंभु सिंह गौड़, नीलेंद्र परस्ते, गुलजार सिंह, अविराज सिंह, प्रदीप मरकाम, धीरेंद्र सिंह, मेवीलाल सिंह, विनोद सिंह और फग्गू सिंह गोंटिया।

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