मुंबई। आईसीसी अध्यक्ष और बीसीसीआई के पूर्व सचिव जय शाह के नेतृत्व में क्रिकेट एक नए ‘स्वर्णिम युग’ में प्रवेश कर चुका है। उनके दूरदर्शी विज़न और सुधारवादी नीतियों ने न केवल भारतीय क्रिकेट बल्कि विश्व क्रिकेट की दिशा ही बदल दी है।
जय शाह के मार्गदर्शन में आईसीसी ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। वर्ष 2023 में पुरुष और महिला टूर्नामेंटों में समान पुरस्कार राशि की घोषणा ने खेल में लैंगिक समानता की मिसाल पेश की। इसके साथ ही उन्होंने कोविड के बाद आईसीसी के वित्तीय ढांचे को मज़बूत किया और क्रिकेट को 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में वापसी दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
आईसीसी में चेयरमैन बनने से पहले बीसीसीआई सचिव के रूप में जय शाह ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने शासन सुधार लागू कर बोर्ड को अधिक पारदर्शी और पेशेवर बनाया। उनके कार्यकाल में आईपीएल ने वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई, वहीं महिला प्रीमियर लीग (WPL) की शुरुआत ने महिला क्रिकेट को नया आयाम दिया।
जय शाह की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही ‘वेतन समानता नीति’, जिसके तहत पुरुष और महिला क्रिकेटरों को समान मैच फीस दी जाने लगी। इसके साथ ही उन्होंने टेस्ट क्रिकेट प्रोत्साहन योजना और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) के आधुनिकीकरण जैसे कदम उठाए, जिनका परिणाम 2023 में भारत द्वारा आयोजित रिकॉर्ड तोड़ आईसीसी विश्व कप में साफ़ दिखा।
बीसीसीआई सचिव के रूप में उनके कार्यकाल में भारत ने मात्र तीन वर्षों में पाँच आईसीसी ट्रॉफियाँ जीतीं:
- आईसीसी अंडर-19 महिला विश्व कप (2023 और 2025)
- आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2024 (17 साल बाद)
- आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 (12 साल में पहली जीत)
- और अब आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025, भारत की पहली ऐतिहासिक खिताबी जीत।
इस ऐतिहासिक जीत पर आईसीसी अध्यक्ष जय शाह ने कहा,
“भारत ने आखिरकार विश्व कप उठा लिया! यह रात महिला क्रिकेट के इतिहास में एक मील का पत्थर थी। बढ़े हुए निवेश, वेतन समानता और डब्ल्यूपीएल की प्रतिस्पर्धा ने भारतीय टीम के जज़्बे और कौशल को नई ऊंचाई दी है।”
जय शाह की रणनीतिक दूरदर्शिता और सुधारों ने क्रिकेट में वह परिवर्तन लाया है जो हर खिलाड़ी और प्रशंसक को एकजुट करता है।
भारत का यह पहला महिला विश्व कप खिताब उनके उस संकल्प का प्रमाण है, जिसमें क्रिकेट को हर किसी के लिए समान अवसरों वाला खेल बनाने की भावना निहित है।


