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Friday, April 17, 2026
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कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों ने किया धान की फसल का निरीक्षण

कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों ने किया धान की फसल का निरीक्षण

कटनी – कृषि विज्ञान केंद्र कटनी एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम द्वारा जिले के गांवों में धान के प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ संजय वैशंपायन एवं उपसंचालक कृषि डॉ आर एन पटेल के नेतृत्व में ग्राम बंडा में लगी हुई धान की फसल का निरीक्षण किया गयाl इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.आर.के मिश्रा, डॉ शशि गौर, डॉ अर्पिता श्रीवास्तव और डॉ आर पी बेन उपस्थित थेl

      भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों ने कृषक श्री हीरामणि हल्दकार के खेत में लगी हुई धान की फसल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया कि फसल में कंडवा, हल्दी गांठ एवं अन्य कीटों का प्रकोप है। कृषि वैज्ञानिकों ने धान की फसलों में कीट और रोग के प्रकोप का निरीक्षण किया और किसानों को नियंत्रण के लिए सलाह दी है। ग्राम के अन्य धान फसल में झुलसा रोग, तना छेदक और भूरा माहू जैसे कीट-रोगों का खतरा बढ़ गया है। नियंत्रण के लिए किसानों को नियमित निगरानी, फेरोमोन ट्रैप, जैविक कीटनाशक (जैसे नीम आधारित) और आवश्यकतानुसार रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग की सलाह दी गई है। साथ ही कृषकों को कृषि वैज्ञानिक एवं कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने को कहा गया है।

निरीक्षण में पाए गए मुख्य कीट और रोग

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि तना छेदक तने के अंदर जाकर नुकसान पहुंचाता है, जिससे बाली सफेद हो जाती है। भूरा माहू (ब्राउन प्लांट हॉपर) पत्तियों से रस चूसता है, जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और उन पर काले फफूंद लग जाते हैं। झुलसा रोग से पत्तियों पर नाव के आकार के धब्बे बनते हैं। वहीं जीवाणु जनित झुलसा (बैकी) रोग भी धान की फसल में देखा गया है। पत्ती लपेटक कीट पत्तियों को लपेटकर अंदर से खा जाता है।

नियंत्रण और प्रबंधन के उपाय

      कृषि वैज्ञानिकों ने कीट और रोग से नियंत्रण और उपाय के लिये खेतों की नियमित निगरानी और कीट-रोग की पहचान होते ही नियंत्रण के उपाय करने की सलाह दी है। इसके अतिरक्‍त फसल अवशेषों को हटाकर खेत की साफ-सफाई रखन और खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने के बार में भी कहा है।

जैविक उपाय

जैविक उपाय के अंतर्गत किसान फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें। नीम आधारित कीटनाशक (जैसे अजाडिरैक्टिन) का छिड़काव करें। फसल में मित्र कीटों (जैसे मकड़ी, ततैया, ड्रैगन फ्लाई) को बढ़ावा दें।

रासायनिक उपाय

      यदि कीटों की संख्या आर्थिक क्षति स्तर से अधिक हो जाए तो ही रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करें। इसके अंतर्गत तना छेदक के लिए कर्टाप हाइड्रोक्लोराइड या क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल का उपयोग किया जा सकता है। भूरा माहू के लिए इमिडाक्लोप्रिड या फिप्रोनिल का छिड़काव किया जा सकता है। झुलसा रोग के लिए ट्राइसाइक्लोजोल या टेबुकोनाजोल जैसी दवाओं का प्रयोग करें।

      अधिक जानकारी के लिए कृषक जिले के कृषि विज्ञान केंद्र एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं।
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