अशोकनगर जिले में आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. जिले में शांति व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अब सोशल मीडिया गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी. प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाना, भड़काऊ पोस्ट डालना या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करना अब भारी पड़ सकता है. ऐसे मामलों में केवल पोस्ट करने वाला ही नहीं, बल्कि संबंधित ग्रुप का एडमिन भी कार्रवाई के दायरे में आएगा.
जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू
अपर कलेक्टर देवकीनंदन सिंह ने पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी है. यह आदेश 7 मई 2026 से अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा. प्रशासन का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए माहौल खराब करने की कोशिशों को समय रहते रोकना जरूरी है.
नए आदेश के तहत व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया ग्रुप चलाने वाले एडमिन की जिम्मेदारी काफी बढ़ा दी गई है. यदि किसी ग्रुप में कोई सदस्य आपत्तिजनक या भड़काऊ पोस्ट शेयर करता है, तो एडमिन को तुरंत उसे हटाना होगा. साथ ही संबंधित सदस्य को ग्रुप से बाहर करना भी जरूरी होगा. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल पोस्ट हटाना काफी नहीं माना जाएगा, बल्कि इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को देना भी अनिवार्य रहेगा.
ग्रुप एडमिन पर सख्त कार्रवाई
अगर कोई ग्रुप एडमिन इस जिम्मेदारी को निभाने में लापरवाही करता है, तो उस पोस्ट के लिए उसे भी जिम्मेदार माना जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यही वजह है कि इस आदेश के बाद सोशल मीडिया ग्रुप एडमिन्स में चिंता बढ़ गई है.
प्रशासन ने सिर्फ ऑनलाइन गतिविधियों पर ही नहीं, बल्कि धरना प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रमों पर भी सख्ती दिखाई है. अब अनुमति प्राप्त प्रदर्शनों में काले झंडे दिखाने, काले कपड़े पहनकर विरोध करने और पुतला दहन जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. इसके अलावा भड़काऊ नारेबाजी को भी प्रतिबंधित किया गया है.
अधिकारियों ने दी चेतावनी
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी धर्म, समुदाय या राजनीतिक व्यक्ति की छवि खराब करने वाली पोस्ट या बयान को गंभीरता से लिया जाएगा. प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की ऐसी सामग्री, जिससे दो समुदायों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका हो, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
पुलिस प्रशासन को है ये आशंका
दरअसल पुलिस प्रशासन को आशंका है कि आगामी आयोजनों के दौरान कुछ असामाजिक तत्व फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अफवाह फैलाने की कोशिश कर सकते हैं. इसी को देखते हुए प्रशासन ने पहले से सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. अधिकारियों ने साफ कहा है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नए आपराधिक कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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