मध्य प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को मातृभाषा से जोड़ने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस कोर्स शुरू होने के बाद अब इंजीनियरिंग शिक्षा में भी हिंदी को बढ़ावा दिया जा रहा है. इंदौर स्थित सरकारी सहायता प्राप्त प्रतिष्ठित संस्थान श्री गोविंदम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज यानी SGSITS ने 2026-27 सत्र से हिंदी माध्यम में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग कोर्स शुरू करने का फैसला लिया है.
हिंदी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू
यह संस्थान हिंदी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने वाला प्रदेश का पहला प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेज बनने जा रहा है. खास बात यह भी है कि जो छात्र पूरे चार साल का बीटेक कोर्स हिंदी माध्यम में पूरा करेंगे, उन्हें अंतिम वर्ष में दो लाख रुपए का विशेष इंसेंटिव दिया जाएगा. इस फैसले को तकनीकी शिक्षा को ज्यादा समावेशी और छात्रों के लिए सहज बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
30 नई सीटें जोड़ी जाएंगी सीट
SGSITS में अभी तक सिविल इंजीनियरिंग की 90 सीटें अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध थीं. अब हिंदी माध्यम के लिए 30 नई सीटें जोड़ी जाएंगी. इसके बाद इस ब्रांच में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 120 हो जाएगी. संस्थान की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष और प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया है. उनका कहना है कि इससे ग्रामीण और हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों को तकनीकी शिक्षा में बेहतर अवसर मिलेंगे.
अंग्रजी किताबों का कराया गया अनुवाद
कॉलेज पिछले चार वर्षों से इस योजना पर काम कर रहा था. AICTE से मान्यता प्राप्त तकनीकी किताबों का हिंदी अनुवाद कराया गया है. इसके अलावा शिक्षकों को द्विभाषी शिक्षण प्रणाली के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि छात्रों को पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी न हो.
कितनी है फीस
अगर फीस की बात करें तो संस्थान में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग समेत कई तकनीकी कोर्स की प्रति सेमेस्टर फीस 50 हजार रुपए तय की गई है. इसके अलावा अन्य शुल्क भी अलग से जमा करने होंगे. पहले सेमेस्टर में छात्रों को लगभग 1 लाख 7 हजार रुपए फीस देनी होगी, जबकि दूसरे से सातवें सेमेस्टर तक फीस करीब 1 लाख 5 हजार रुपए रहेगी. अंतिम सेमेस्टर में डिग्री और माइग्रेशन फीस जुड़ने के कारण फीस थोड़ी बढ़ जाएगी. राज्य सरकार और संस्थान का मानना है कि हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग शिक्षा शुरू होने से तकनीकी पढ़ाई में भाषा की बाधा कम होगी और ज्यादा छात्र आत्मविश्वास के साथ इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे.
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