मध्य प्रदेश इस बार गेहूं उपार्जन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है. पंजाब के बाद सबसे ज्यादा गेहूं खरीदी अब मध्य प्रदेश में हो रही है. प्रदेश में अब तक 10 लाख से ज्यादा किसानों से 63 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा जा चुका है. सरकार के अनुसार खरीदी प्रक्रिया लगातार तेज गति से चल रही है और हर दिन करीब 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित किया जा रहा है.
गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश नंबर 1
खाद्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक केवल 9 मई को ही 4 लाख 86 हजार मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी दर्ज की गई. जिस रफ्तार से उपार्जन हो रहा है, उसे देखते हुए माना जा रहा है कि 23 मई तक 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य आसानी से पूरा कर लिया जाएगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने भी प्रदेश के लिए गेहूं खरीदी लक्ष्य बढ़ा दिया है. पहले यह लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन तय किया गया था, जिसे बढ़ाकर अब 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है. समर्थन मूल्य पर खरीदी की प्रक्रिया 23 मई तक जारी रहेगी.
किसानों ने इतने स्लॉट कराई बुकिंग
प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं. अब तक 14 लाख 83 हजार किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई है. वहीं किसानों के खातों में 11 हजार 623 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि भी ट्रांसफर की जा चुकी है. किसान लाभान्वित होने के मामले में भी मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे निकलता दिखाई दे रहा है. हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों की तुलना में यहां सबसे अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य खरीदी योजना का फायदा उठाया है.
मोहन यादव रख रहे हैं निगरानी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद लगातार खरीदी व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं. वे अलग-अलग उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और किसानों को मिल रही सुविधाओं का जायजा ले रहे हैं. निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री किसानों से सीधे बातचीत कर भुगतान और खरीदी प्रक्रिया की जानकारी भी लेते हैं. सरकार का दावा है कि लगातार मॉनिटरिंग और निरीक्षण के कारण खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाएं पहले से ज्यादा व्यवस्थित और आसान हुई हैं. मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी प्रदेशभर के केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
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