सतना/अंकित शर्मा/खबर डिजिटल/ सतना जिला अस्पताल में गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एसडीएम राहुल सिलाडिया ने मौके पर ही खून की दलाली कर रहे तीन दलालों को लाइव पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई से जिला अस्पताल में लंबे समय से चल रहे खून के काले कारोबार का एक बार फिर खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में यह अवैध धंधा लंबे समय से चल रहा था, जिसे ब्लड बैंक के एक बड़े कर्मचारी का संरक्षण मिलने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि संबंधित कर्मचारी फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर बताया जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक कब तक पहुंच पाता है।
कैसे हुआ खुलासा
जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान एसडीएम राहुल सिलाडिया को एक पीड़ित मिला, जिसने बताया कि उसके मरीज को तत्काल ब्लड की आवश्यकता है। पीड़ित ने अस्पताल के सामने चाय-पान की दुकान पर ब्लड की जरूरत बताई, जहां रजनीश साहू नामक दलाल ने 4500 रुपये में खून उपलब्ध कराने का सौदा किया। पीड़ित ने इस पूरे मामले की जानकारी एसडीएम को दी। इसके बाद एसडीएम राहुल सिलाडिया ने स्वयं जेब से 4500 रुपये देकर सौदे को आगे बढ़वाया। जैसे ही दलाल ने पैसे लेकर ब्लड डोनर को बुलाया, एसडीएम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। तलाशी के दौरान वही 4500 रुपये बरामद हुए, जो एसडीएम ने दिए थे।
पुलिस के हवाले किए गए दलाल
पकड़े गए दलाल को तत्काल कोतवाली थाना सतना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इसी कार्रवाई के दौरान एक के बाद एक तीन खून के दलालों को पकड़ा गया है।
एचआईवी संक्रमित खून की आशंका
गौरतलब है कि सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की दलाली का मामला पहले भी सामने आ चुका है। आशंका जताई जा रही है कि एचआईवी संक्रमित खून चढ़ने से थैलेसीमिया से पीड़ित छह बच्चों का जीवन खतरे में पड़ गया, जो पहले ही मीडिया की सुर्खियों में रहा है। इस गंभीर मामले की जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकार की दो अलग-अलग टीमें पहले से ही जिला अस्पताल में जांच कर रही हैं।
प्रशासन सख्त, जांच जारी
एसडीएम राहुल सिलाडिया की इस कार्रवाई के बाद जिला अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और ब्लड बैंक से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि खून के इस काले कारोबार के पीछे बैठे मुख्य सरगनाओं तक प्रशासन और पुलिस कब तक पहुंच पाती है।


