आलीराजपुर/कुलदीप खराडीया/खबर डिजिटल/ कृषि विज्ञान केंद्र आलीराजपुर की पहल से आदिवासी बहुल जिले में पहली बार रबी मौसम में तिलहन फसल कुसुम (Safflower) की शुरुआत की गई है। इसके पीछे उनकी मंशा है कि किसानों को परंपरागत कृषि से हटाकर उन्नत कृषि की तरफ बढ़ाया जाए, ताकि कम फर्टिलाइजर और पानी के बिना भी बेहतर फसल मिल सके, जिससे अतिरिक्त आय का रास्ता खुले।
बिना कांटों वाली उन्नत कृषि
रबी 2025-26 में प्राकृतिक खेती के अंतर्गत जिले में 95 प्रदर्शन लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए गए हैं। किसानों को बिना कांटों वाली उन्नत किस्म जे.एस.एफ. 01 उपलब्ध कराई गई, तथा 26 अक्टूबर 2025 को वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया। कुसुम कम लागत में, सभी प्रकार की मिट्टी में बिना रसायनों के उगाई जाने वाली फसल है।
किसानों को मिलेगा आर्थिक लाभ
आर्थिक रूप से यह फसल किसानों के लिए लाभकारी है, जिसमें बीज (लगभग 6500 रुपये प्रति क्विंटल) और फूल (500 रुपये प्रति किलो) दोनों से आय प्राप्त होगी। इसके फूलों में औषधीय गुण भी पाए जाते हैं।
इंदौर से संस्थान से मिला सहयोग
किसानों के उत्पाद के विपणन एवं भविष्य में कुसुम तेल प्रसंस्करण इकाई स्थापना हेतु कृषि महाविद्यालय, इंदौर की अखिल भारतीय कुसुम परियोजना से सहयोग लिया गया है। यह पहल जिले में तिलहन उत्पादन एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नवाचार है। उक्त जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र आलीराजपुर द्वारा दी गई।


