जैसे-जैसे भारत केंद्रीय बजट 2026-27 की ओर बढ़ रहा है, देश के सामान्य बीमा उद्योग ने सरकार से इसे एक पूरक वित्तीय उत्पाद के बजाय एक मूल ‘आर्थिक अवसंरचना’ (Economic Infrastructure) के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस के सीईओ, राकेश जैन के अनुसार, भारत एक ऐसे ‘इन्फ्लेक्शन पॉइंट’ पर खड़ा है जहाँ तीव्र शहरीकरण, डिजिटल विस्तार और जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को देखते हुए बीमा क्षेत्र को सुदृढ़ करना राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने पिछले वर्ष के सुधारों, जैसे स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी छूट और ‘बीमा सुगम’ की शुरुआत को एक मजबूत आधार बताया, जिसे अब ठोस परिणामों में बदलने की आवश्यकता है।
राकेश जैन ने बजट से तीन निर्णायक प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है। पहली प्राथमिकता डिजिटल ढांचे को सशक्त बनाना है ताकि धोखाधड़ी और प्रशासनिक लागत को कम किया जा सके। उन्होंने ‘नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज’ के पूर्ण वित्तपोषण और ‘बीमा सुगम’ के त्वरित क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि ई-केवाईसी और एकीकृत सेवा मंच के माध्यम से ग्राहकों के लिए प्रक्रिया सरल हो सके। दूसरी प्राथमिकता के तहत, उन्होंने घरेलू पुनर्बीमा क्षमता को मजबूत करने और एआई (AI) व टेलीमैटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों को प्रोत्साहन देने की मांग की है, जो भविष्य के मोबिलिटी और साइबर जोखिमों से निपटने में सहायक होंगी।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता के रूप में, उन्होंने भारत की जलवायु परिस्थितियों और एमएसएमई (MSME) क्षेत्र के लिए ‘नेशनल कैटास्ट्रॉफी रिस्क पूल’ के निर्माण का सुझाव दिया है। शहरी बाढ़, चक्रवात और अत्यधिक गर्मी की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए, उन्होंने गिफ्ट आईएफएससी (GIFT IFSC) के माध्यम से भारत के पहले संप्रभु कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड को सक्षम बनाने और उच्च जोखिम वाले जिलों में माइक्रो इंश्योरेंस के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ का प्रस्ताव रखा है। उनके अनुसार, गृह बीमा और छोटे व्यवसायों के लिए कर लाभ और सरल उत्पाद ढांचे को बढ़ावा देना न केवल बीमा पैठ (Insurance Penetration) को बढ़ाएगा, बल्कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में एक सुरक्षित और समावेशी नींव भी तैयार करेगा।


