भोपाल से एक अहम खबर सामने आ रही है, जहां मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार किसानों को राहत देने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है. इस प्रस्तावित बदलाव का मकसद किसानों को कर्ज चुकाने के दबाव से कुछ हद तक राहत देना है. अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो किसानों को साल में दो बार ऋण चुकाने की बाध्यता से छुटकारा मिल सकता है.
किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी
नई योजना के तहत सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि किसान पूरे साल का फसल ऋण एक ही बार में चुका सकें. इसके लिए मई या जून का समय तय किया जा सकता है, जब रबी और खरीफ दोनों सीजन का कर्ज एक साथ जमा करने की सुविधा मिलेगी. इससे किसानों को भुगतान के लिए ज्यादा समय मिलेगा और वे अपनी फसल का सही दाम मिलने के बाद ही ऋण चुकाने का फैसला कर पाएंगे.
अभी क्या है व्यवस्था
वर्तमान व्यवस्था की बात करें तो अभी किसानों को अलग-अलग सीजन के हिसाब से कर्ज लौटाना पड़ता है. खरीफ फसल का ऋण आमतौर पर मार्च तक चुकाना होता है, जबकि रबी फसल के लिए जून तक का समय मिलता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि किसानों को अपनी उपज बेचने में देरी हो जाती है या उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल पाता. ऐसी स्थिति में वे तय समय पर ऋण नहीं चुका पाते और डिफॉल्टर घोषित कर दिए जाते हैं. इसका सीधा असर यह होता है कि उन्हें भविष्य में मिलने वाले ब्याजमुक्त ऋण जैसी सुविधाओं से वंचित होना पड़ता है.
मध्यप्रदेश सरकार करेगी बदलाव
इन्हीं परेशानियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सहकारिता और वित्त विभाग ने मिलकर एक नई रूपरेखा तैयार की है. इसमें किसानों को अधिक लचीलापन देने और उन्हें आर्थिक दबाव से बचाने पर खास ध्यान दिया गया है. यह भी माना जा रहा है कि रबी फसल की बिक्री आमतौर पर मई-जून तक पूरी हो जाती है, इसलिए उसी अवधि को ऋण चुकाने के लिए उपयुक्त समय माना जा रहा है.
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में सहकारी समितियों के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों को अल्पकालीन फसल ऋण दिया जाता है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 35 लाख किसानों को 21 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज वितरित किया गया है. सरकार तीन लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराकर किसानों की लागत कम करने की कोशिश कर रही है, ताकि खेती को ज्यादा लाभकारी बनाया जा सके. सूत्रों के अनुसार, इस नई व्यवस्था को जल्द ही कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है. अगर इसे हरी झंडी मिल जाती है, तो प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ी राहत मिलेगी. इससे वे बिना किसी जल्दबाजी के अपनी फसल बेचकर बेहतर कीमत हासिल कर सकेंगे और उसके बाद ही आसानी से अपना कर्ज चुका पाएंगे.
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