मध्यप्रदेश भाजपा में काफी समय से चल रही गुटबाजी अब कुछ हद तक कमजोर पड़ती दिख रही है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिल रहा है, जिससे संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनता नजर आ रहा है. इसी दिशा में पार्टी अब पुराने और अनुभवी नेताओं को फिर से सक्रिय भूमिका देने की तैयारी कर रही है.
पुराने नेताओं को मिलेगा मौका
इन दिनों जयभान सिंह पवैया की वापसी को लेकर सियासी हलकों में काफी चर्चा है. कभी गुटीय खींचतान के कारण किनारे हो गए पवैया को अब वित्त आयोग के माध्यम से फिर जिम्मेदारी दी गई है. इसे भाजपा नेतृत्व का संकेत माना जा रहा है कि अनुभवी नेताओं को फिर से महत्व दिया जाएगा और संगठन को मजबूत करने के लिए उन्हें आगे लाया जाएगा.
निगम मंडलों में भी हो रही नियुक्तियां
वहीं दूसरी ओर निगम, मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में लगातार राजनीतिक नियुक्तियां की जा रही हैं. वित्त आयोग में जयभान सिंह पवैया, अनुसूचित जाति आयोग में डॉ. कैलाश जाटव, अनुसूचित जनजाति आयोग में रामलाल रौतेल, राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम में केशव सिंह बघेल और ग्वालियर मेला प्राधिकरण में अशोक जादौन को जिम्मेदारी दी जा चुकी है. दिलचस्प बात यह रही कि इन नियुक्तियों का श्रेय किसी एक गुट ने खुलकर लेने की कोशिश नहीं की. जानकारों का मानना है कि इन नामों का चयन सभी राजनीतिक संतुलनों को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि गुटीय संतुलन बना रहे और अनुभवी नेताओं को सम्मान भी मिल सके.
इन नेताओं को मिल सकता है मौका
अब पार्टी के भीतर अगली नियुक्तियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. केशव भदौरिया, पंचूलाल प्रजापति, अजय सिंह, संजय तीर्थानी, मनोहर पोरवाल, गोविंद काकड़, प्रवीण सोनी, रवि सोलंकी, मुकेश यादव, रवि वर्मा, राममोहन बघेल, साधना स्थापक, समीक्षा गुप्ता, सोनम निनामा, अर्चना गुप्ता, मोनिका वट्टी और सीमा सिंह जैसे नामों पर विचार किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार इन नेताओं की सक्रियता और संगठन में उनके योगदान का आकलन किया जा रहा है. संभावना जताई जा रही है कि निगम और मंडलों की अगली सूची जल्द सामने आ सकती है, जिसमें इन चेहरों को अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. भाजपा की मौजूदा रणनीति से यह संकेत मिलता है कि पार्टी 2028 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बनाकर संगठन को मजबूत करना चाहती है.
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