डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। इसी बीच पीएम मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से ईंधन और खाने के तेल का इस्तेमाल समझदारी से करने की अपील की। उन्होंने लोगों से अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचने की सलाह भी दी। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पेट्रोल-डीजल कीमतों में फिलहाल नहीं हुआ बदलाव
बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की अटकलें लगातार लगाई जा रही हैं। हालांकि बुधवार, 13 मई को देशभर में ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया। सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल पुराने दाम ही बरकरार रखे हैं। तेल विपणन कंपनियां हर दिन सुबह करीब 6 बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और सप्लाई की स्थिति को देखते हुए नई दरें तय की जाती हैं। फिलहाल कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में हालात बदल सकते हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव से प्रभावित हुआ वैश्विक बाजार
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर तेजी से दिखाई दे रहा है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ समेत कई समुद्री मार्ग प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। इससे कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकारी तेल कंपनियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
देश की सरकारी तेल कंपनियां इस समय भारी आर्थिक दबाव का सामना कर रही हैं। जानकारी के अनुसार इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर रोजाना हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान के मुताबिक तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और घरेलू गैस सिलेंडर पर लगभग 674 रुपये तक का घाटा हो रहा है। ऐसे में कंपनियों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
ऊर्जा बचत को लेकर सरकार का फोकस बढ़ा
प्रधानमंत्री मोदी की अपील को ऊर्जा सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार फिलहाल ईंधन की खपत कम करने और संसाधनों के संतुलित उपयोग पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं तो सरकार को भविष्य में कई आर्थिक फैसले लेने पड़ सकते हैं। सोने की खरीद कम करने और ईंधन बचाने की अपील को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो और देश वैश्विक संकट के असर से सुरक्षित रह सके।
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