ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर 21 मई से देशभर में ट्रकों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई है. इस हड़ताल का असर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भी साफ दिखाई देगा. ट्रांसपोर्टरों का विरोध दिल्ली एनसीआर में लागू नियमों, कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट और दिल्ली नगर निगम की नीतियों के खिलाफ है. साथ ही लगातार बढ़ती डीजल और पेट्रोल की कीमतों को लेकर भी ट्रांसपोर्ट कारोबारी नाराज हैं.
एमपी में ट्रकों की हड़ताल
हड़ताल की वजह से शहर में माल की आवाजाही लगभग ठप हो जाएगी. न तो बाहर से सामान शहर तक पहुंच पाएगा और न ही यहां से दूसरे राज्यों के लिए माल भेजा जा सकेगा. ट्रांसपोर्ट यूनियन का कहना है कि इसका सीधा असर व्यापार और बाजार व्यवस्था पर पड़ेगा. स्थानीय ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष राजीव मोदी के अनुसार ग्वालियर और आसपास के जिलों में रोजाना चलने वाले करीब 300 लोडिंग वाहन हड़ताल के दौरान बंद रहेंगे. इससे स्थानीय स्तर पर सामान की ढुलाई पूरी तरह प्रभावित होगी. बाजारों तक माल पहुंचाने और गोदामों से दुकानों तक सप्लाई करने का काम रुक जाएगा.
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट ने क्या कहा
वहीं ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस से जुड़े सुनील माहेश्वरी ने बताया कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से रोजाना करीब 400 ट्रक दिल्ली के लिए रवाना होते हैं और वहां से माल लेकर वापस आते हैं. हड़ताल के चलते इन ट्रकों का संचालन भी बंद रहेगा. उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों से दिल्ली एनसीआर में ट्रकों की लोडिंग भी प्रभावित चल रही है. इस हड़ताल का असर सबसे ज्यादा किराना, रेडीमेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जरूरी सामानों पर पड़ सकता है. ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इन वस्तुओं की बड़ी सप्लाई दिल्ली से होती है. वहीं यहां से तेल और अन्य उत्पाद दिल्ली भेजे जाते हैं. ट्रकों के बंद रहने से तीन दिन तक यह व्यापार प्रभावित रहेगा. स्थिति यह भी है कि अगर कुछ ट्रक किसी तरह शहर तक पहुंच भी जाएं, तब भी स्थानीय स्तर पर माल ढुलाई करने वाले वाहन बंद रहेंगे. ऐसे में सामान को बाजारों और आसपास के जिलों तक पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा. व्यापारियों का मानना है कि अगर हड़ताल लंबी चली तो बाजार में जरूरी सामान की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.
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