मुंबई : भारतीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) ने वर्ष 2025 के दौरान वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद परिसंपत्ति की बेहतर गुणवत्ता और मजबूत ऋण वृद्धि के साथ अपनी लचीली कार्यप्रणाली का प्रदर्शन किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र ने जोखिम के प्रति एक अनुशासित दृष्टिकोण अपनाते हुए भारत की वित्तीय व्यवस्था में अपनी प्रासंगिकता को और सुदृढ़ किया है। गोदरेज कैपिटल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी मनीष शाह ने इस वर्ष को ‘संयमित मजबूती’ का काल बताते हुए कहा कि एनबीएफसी ने बदलते वृहत-आर्थिक हालात के बीच भी ऋण विस्तार और लाभप्रदता के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
वर्ष 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धि टेक्नोलॉजी-आधारित मॉडलों का उदय रही है, जिसने पारंपरिक ऋण वितरण ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। शाह के अनुसार, वैकल्पिक डेटा और क्यूआर भुगतान इतिहास जैसे डिजिटल सिग्नल्स के उपयोग से उन व्यापारियों और छोटे उद्यमों (MSMEs) तक औपचारिक ऋण की पहुंच संभव हुई है, जो अब तक इस सुविधा से वंचित थे। डिजिटल प्रक्रियाओं ने न केवल वित्तीय समावेशन की कमी को पाटा है, बल्कि उधारकर्ताओं के साथ जुड़ाव को भी अधिक पारदर्शी और तेज बनाया है। हाउसिंग फाइनेंस, स्वर्ण ऋण और किफायती आवास जैसे खंडों ने दहाई अंकों में प्रबंधन के तहत संपत्ति (AUM) में वृद्धि दर्ज की है, जो इस क्षेत्र की व्यापक विकास क्षमता को दर्शाता है।
आगामी वर्ष 2026 के लिए उद्योग का दृष्टिकोण काफी आशावादी है। बेहतर तरलता (Liquidity) और निरंतर नियामकीय समर्थन के संकेतों के बीच यह क्षेत्र संतुलित और विकास-उन्मुख रहने की उम्मीद है। मनीष शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि एनबीएफसी अब बाजार में गहरी पैठ बनाने और ‘वहनीय अंडरराइटिंग’ (Sustainable Underwriting) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे जिम्मेदार विस्तार की संभावनाएं और प्रबल होंगी। 2025 में बनी यह सकारात्मक गति 2026 के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार कर चुकी है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


